Deosar Hospital Health Crisis : सिंगरौली: देवसर शासकीय अस्पताल की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने स्थानीय जनता की जान जोखिम में डाल दी है। इस गंभीर समस्या को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के अध्यक्ष सुदामा प्रसाद कुशवाहा और संगठन मंत्री उसैद हसन सिद्दीकी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अस्पताल की स्थिति नहीं सुधरी, तो जनता के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
रेफरल की बीमारी से जूझता अस्पताल: ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि देवसर अस्पताल आसपास की दर्जनों पंचायतों के लिए एकमात्र सहारा है, लेकिन यहाँ की सुविधाएं शून्य के बराबर हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सुदामा कुशवाहा ने आरोप लगाया कि सामान्य बुखार या छोटी चोट लगने पर भी डॉक्टरों द्वारा मरीजों को रीवा या ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में न तो आईसीयू (ICU) की सुविधा है और न ही सोनोग्राफी जैसे आवश्यक उपकरण, जिससे गरीब मरीजों पर निजी एंबुलेंस और बाहर के इलाज का भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
महिला विशेषज्ञों की कमी और जान का जोखिम: अस्पताल में स्थायी स्त्री रोग विशेषज्ञ की अनुपस्थिति सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। प्रसव के मामलों में विशेषज्ञ न होने के कारण ग्रामीण महिलाओं को समय पर उपचार नहीं मिल पाता, जिससे जच्चा-बच्चा की जान को खतरा बना रहता है। नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि जब अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर और पर्याप्त स्टाफ ही नहीं है, तो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा कैसे किया जा सकता है?
व्यवस्था में सुधार की मांग: पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक शाह सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि शाम और रात के समय आपातकालीन सेवाएं अक्सर ठप रहती हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि देवसर अस्पताल में तत्काल इमरजेंसी केयर यूनिट की स्थापना की जाए, आधुनिक जांच मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित हो और विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियमित पदस्थापना की जाए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की।











