नई दिल्ली : दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार ब्लास्ट को लेकर जांच एजेंसियों को बड़ा सुराग हाथ लगा है। इस मामले में गिरफ्तार डॉक्टरों के एक ग्रुप का मकसद सिर्फ एक धमाका नहीं, बल्कि देशभर में यहूदियों से जुड़ी ग्लोबल कॉफी चेन के आउटलेट्स पर हमले करना था। बताया जा रहा है कि यह व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल पिछले चार वर्षों से सक्रिय था।
डॉक्टरों के ग्रुप में टारगेट को लेकर मतभेद
अंग्रेजी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई, अदील अहमद राथर और उत्तर प्रदेश के शाहीन सईद ने पूछताछ में खुलासा किया कि हमलों के टारगेट को लेकर उनके बीच मतभेद थे। कुछ सदस्य दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में कॉफी चेन आउटलेट्स पर हमला कर इजरायल की गाजा में सैन्य कार्रवाई के खिलाफ वैश्विक संदेश देना चाहते थे।
AGUH को दोबारा खड़ा करने की योजना
जांच में यह भी सामने आया है कि यह ग्रुप अलकायदा की भारतीय शाखा अंसार गजवत उल हिंद (AGUH) को फिर से सक्रिय करना चाहता था। AGUH की स्थापना आतंकी जाकिर मूसा ने की थी, जो 2019 में मुठभेड़ में मारा गया था। आरोपियों का मकसद देश में इस्लामिक कानून लागू करना बताया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस की 20 दिन की जांच
दिल्ली ब्लास्ट से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 20 दिन की गहन जांच की थी। यह जांच अक्टूबर 2025 में श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के पैंफलेट मिलने के बाद शुरू हुई थी। इसी जांच के दौरान फरीदाबाद में छापेमारी कर आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ, जहां से 2900 किलो विस्फोटक और आधुनिक हथियार बरामद किए गए।
लोकल सामान से बम बनाने का एक्सपेरिमेंट
गिरफ्तार डॉक्टरों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने ऑनलाइन वीडियो देखकर बम बनाने के प्रयोग किए। पुलिस को हजारों किलो यूरिया और कई केमिकल्स मिले हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर मिलने वाले सामान से बम तैयार किए जा सकें और शक न हो।
जल्दबाजी में किया गया हमला
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आतंकी उमर उन नबी ने जल्दबाजी में करीब 40 किलो विस्फोटक कार में लगाया था। यह हमला संभवतः उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद किया गया। उसके फोन से सुसाइड बॉम्बिंग और शहादत ऑपरेशन से जुड़ा वीडियो भी बरामद हुआ है।











