निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : देशभर में जनप्रतिनिधियों पर चल रहे आपराधिक मामलों के बीच मध्यप्रदेश के दतिया से विधायक राजेंद्र भारती से जुड़े केस में बड़ा फैसला सामने आया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को भारती और उनके सह-आरोपी को दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा सुनाई है।
किन धाराओं में हुए दोषी करार
कोर्ट ने माना कि विधायक ने आपराधिक साजिश रचते हुए बैंक रिकॉर्ड में धोखाधड़ी की। उन्हें आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 और 471 (जालसाजी) के तहत दोषी पाया गया।
जमानत और अपील का मौका
हालांकि सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर तत्काल जमानत दे दी है। साथ ही हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 30 दिनों का समय भी दिया गया है।
तुरंत खत्म हुई सदस्यता
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक ‘लिली थॉमस बनाम भारत सरकार’ फैसले के तहत 2 साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाती है। इसी के चलते राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता भी खत्म कर दी गई है और दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया है।
उपचुनाव की संभावना
यदि 30 दिनों के भीतर हाईकोर्ट से सजा पर स्टे नहीं मिलता है, तो दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराए जा सकते हैं। इस फैसले से प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
क्या है लिली थॉमस केस?
सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2013 को लिली थॉमस केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(4) को असंवैधानिक करार दिया था। इस फैसले के बाद 2 साल या उससे अधिक सजा पाने वाले सांसद या विधायक की सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है और वह सजा पूरी होने के बाद 6 साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहता है।











