नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रेजुएशन डिग्री से जुड़ी जानकारी उजागर करने के केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि शैक्षणिक रिकॉर्ड और डिग्री का खुलासा करना अनिवार्य नहीं है।
Read News : Ganesh Chaturthi 2025 : सपने में गणेश जी का दर्शन : जानिए क्या संदेश देता हैं….
यह मामला 2016 में दाखिल एक आरटीआई याचिका से जुड़ा है। केंद्रीय सूचना आयोग ने 21 दिसंबर 2016 को दिल्ली यूनिवर्सिटी को आदेश दिया था कि 1978 में बीए की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड का निरीक्षण करने दिया जाए। उसी वर्ष पीएम मोदी ने भी परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
CIC का आदेश और विवाद
सीआईसी ने अपने आदेश में कहा था कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति, खासकर प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यताओं में पारदर्शिता होनी चाहिए। आयोग ने यहां तक कहा था कि यह रिकॉर्ड सार्वजनिक दस्तावेज है और इसे उजागर किया जाना चाहिए।
Read News : Hartalika TeeJ 2025 : हरतालिका तीज कल, पूजा का शुभ मुहूर्त और जरूरी सामग्री की पूरी जानकारी यहां….
हालांकि, यूनिवर्सिटी ने तीसरे पक्ष से संबंधित जानकारी साझा न करने के प्रावधान का हवाला देते हुए इसे देने से इंकार कर दिया था। इसके खिलाफ CIC ने आदेश पारित किया, जिसे अब हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है।
सरकार का तर्क
यूनिवर्सिटी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि ऐसे रिकॉर्ड को उजागर करना खतरनाक मिसाल होगी और इससे सरकारी अधिकारियों के कामकाज में बाधा आ सकती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर यह मुद्दा उठा रहे हैं।











