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Child custody : सुप्रीम कोर्ट ने पलटा अपना फैसला, 12 साल के बच्चे की कस्टडी मां को सौंपी – इंसाफ की नई मिसाल बनी यह कहानी

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Child Custody : नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने न्याय प्रणाली में मानवीय संवेदनाओं को सबसे ऊपर रखने की मिसाल कायम की है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपने ही 10 महीने पुराने आदेश को पलटते हुए एक 12 साल के बच्चे की कस्टडी उसकी मां को सौंप दी है, जिसे पहले उसके पिता को दिया गया था।

क्या है पूरा मामला…

2011 में शादी और दो साल बाद तलाक हो चुका था। इसके बाद बच्चा मां के साथ रह रहा था। लेकिन 2022 में पिता ने यह कहते हुए कस्टडी मां से मांगी कि वह अब मलेशिया जाकर बसना चाहते हैं। पहले केरल हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए बच्चे की कस्टडी पिता को दे दी।

लेकिन इसके बाद क्या हुआ…

बच्चा अपने पिता के साथ नहीं रहना चाहता था। कोर्ट के फैसले के बाद उसका मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य बुरी तरह बिगड़ गया। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चा अब वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में मानसिक इलाज करा रहा है। वह डरा, सहमा और अंदर से टूटा हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट ने मानी अपनी गलती

सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच — जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले ने मां की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की। याचिका के साथ मेडिकल रिपोर्ट भी थी, जिसमें साफ लिखा था कि बच्चा गहरे मानसिक तनाव और डर का शिकार है।

बेंच ने माना कि:

“हमने पहले फैसला सुनाते समय बच्चे से बात नहीं की। हमने माता-पिता के वकीलों की दलीलों पर ज्यादा ध्यान दिया। लेकिन अब हम मानते हैं कि वह एक गंभीर गलती थी।”

मां को दी गई कस्टडी, पिता को दिया गया मिलने का अधिकार

हालांकि मां ने दूसरी शादी कर ली है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह इस बात का सबूत नहीं है कि उसने अपने बेटे से प्यार कम कर दिया है। बच्चा अपने सौतेले पिता और भाई के साथ सहज है और खुद को सुरक्षित महसूस करता है।

कोर्ट का मानवीय दृष्टिकोण

कोर्ट ने कहा:

“कानूनी आदेश कभी-कभी नाबालिग बच्चों की कोमल भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। यह मामला दर्शाता है कि बच्चों की कस्टडी के मामलों में न्याय केवल दलीलों पर नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और बच्चों की भावनात्मक स्थिति पर आधारित होना चाहिए।”

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VIKASH KHALKHO
VIKASH KHALKHO
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

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