Wednesday, September 30, 2026
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छत्तीसगढ़ : SIR को लेकर बड़ा अपडेट! बढ़ सकती है दावा-आपत्ति की समय-सीमा, भेजा प्रस्ताव

रायपुर: छत्तीसगढ़ में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को लेकर एक अहम प्रशासनिक निर्णय जल्द सामने आ सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग ने दावा-आपत्ति दाखिल करने की मौजूदा समयसीमा को एक सप्ताह बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्रीय निर्वाचन आयोग को भेज दिया है। अब केंद्रीय स्तर से मंजूरी मिलते ही इस पर औपचारिक घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।

यह फैसला ऐसे समय में प्रस्तावित किया गया है, जब प्रदेशभर में लाखों मतदाताओं का सत्यापन अब भी अधूरा है और बड़ी संख्या में नोटिस लंबित पड़े हुए हैं।

लाखों मामलों का सत्यापन अब भी बाकी

निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनका समय पर भौतिक सत्यापन नहीं हो सका।
कई मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन न तो जवाब प्राप्त हुआ है और न ही अंतिम निर्णय हो पाया है। वहीं हजारों प्रकरणों में सुनवाई के बाद भी फैसला लंबित है। इन्हीं व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए समयसीमा बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई है।

22 जनवरी तक तय है मौजूदा अंतिम तारीख

फिलहाल नियमों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में दावा-आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 जनवरी निर्धारित है।
इसके बाद 22 जनवरी से 21 फरवरी तक विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाना है। इस दौरान नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, बल्कि पहले से प्राप्त दावों और आपत्तियों का ही परीक्षण किया जाएगा।
यदि समयसीमा बढ़ती है, तो लाखों मतदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

6.40 लाख मतदाता ‘नो-मैपिंग’ श्रेणी में

SIR प्रक्रिया के तहत लगभग 6.40 लाख मतदाताओं को ‘नो-मैपिंग’ श्रेणी में रखा गया है।
इसका अर्थ है कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) इन मतदाताओं तक भौतिक रूप से नहीं पहुंच सके। इसके पीछे घर बंद होना, पता न मिलना या लंबे समय से निवास न करना जैसे कारण सामने आए हैं।

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नोटिस के बाद दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य

इन सभी नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। नोटिस मिलने के बाद मतदाता को एसडीएम के समक्ष उपस्थित होकर 13 मान्य दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
दस्तावेजों की जांच के बाद ईआरओ (Electoral Registration Officer) यह तय करेंगे कि नाम मतदाता सूची में रहेगा या हटाया जाएगा।यदि कोई मतदाता ईआरओ के निर्णय से असंतुष्ट होता है, तो उसे जिला कलेक्टर के पास अपील का अधिकार भी दिया गया है।

2003 की मतदाता सूची बनी आधार

इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया में 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाया गया है। जिन मतदाताओं का नाम उस सूची में नहीं मिल रहा, उनसे रिश्तेदारों के नाम और अन्य प्रमाण मांगे जा रहे हैं।
जहां यह जानकारी भी उपलब्ध नहीं है, ऐसे मामलों को ‘C कैटेगरी’ में रखकर अलग से नोटिस जारी किए गए हैं।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय निर्वाचन आयोग समयसीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को कब तक मंजूरी देता है।

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