Saturday, August 15, 2026
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Attached Staff Action CG: स्कूल शिक्षा विभाग में वर्षों से संलग्न कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई के संकेत, लोक शिक्षण संचालनालय ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

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Attached Staff Action CG: गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा (रायगढ़)। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग के भीतर प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से एक बहुत बड़ा विधिक निर्णय लिया गया है। विभाग में अपनी मूल पदस्थापना छोड़कर वर्षों से विभिन्न मलाईदार कार्यालयों में संलग्न (अटैच) होकर आराम फरमा रहे शिक्षकों और लिपिकवर्गीय कर्मचारियों की मुश्किलें अब विधिक रूप से बढ़ने वाली हैं। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), छत्तीसगढ़ ने 25 जून 2026 को एक अत्यंत कड़ा आधिकारिक आदेश जारी किया है।

इस विधिक आदेश के तहत प्रदेश के सभी संभागीय संयुक्त संचालकों (JD) और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से उनके अधीन संलग्न समस्त कर्मचारियों व शिक्षकों की विस्तृत सूची निर्धारित प्रारूप में तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है, जिससे समूचे विभाग में प्रशासनिक हलचल मच गई है।

शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में लिया गया विधिक निर्णय, मूल संस्थानों में लौटना होगा अनिवार्य

संचालनालय द्वारा जारी विधिक पत्र के अनुसार, विगत दिनों स्कूल शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई थी। इस बैठक में प्रदेश के दूरस्थ अंचलों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संभागीय संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और विकासखंड स्रोत समन्वयक (BRCC) कार्यालयों में जितने भी कर्मचारी या शिक्षक विधिक नियमों के विपरीत या प्रशासनिक तौर पर संलग्न हैं, उन्हें तत्काल कार्यमुक्त किया जाए।

इसके साथ ही, उन्हें उनके मूल पदस्थापना वाले शिक्षण संस्थानों या कार्यालयों में विधिक रूप से कार्यभार ग्रहण कराने की त्वरित दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

निर्धारित प्रारूप में मांगी गई पूरी कुंडली, अधिकारियों के विधिक आदेशों की भी होगी जांच

लोक शिक्षण संचालनालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रत्येक जिला प्रशासन से एक विशेष प्रारूप में जानकारी तलब की है। इस प्रारूप में संलग्न कर्मचारी का पूरा नाम, उनका विधिक पदनाम, वर्तमान में वे किस कार्यालय में सेवाएं दे रहे हैं, तथा उन्हें किस अधिकारी के विधिक आदेश क्रमांक और दिनांक के तहत संलग्न किया गया था, इन सभी बिंदुओं की प्रामाणिक जानकारी मांगी गई है।

इस कड़े कदम के बाद अब शिक्षा विभाग के गलियारों में कई गंभीर विधिक सवाल तैरने लगे हैं कि आखिर किन रसूखदार अधिकारियों के मौखिक या लिखित आदेशों के बल पर नियमों को ताक पर रखकर यह संलग्नीकरण वर्षों तक चलता रहा।

बिना वैध आदेश के जमे कर्मचारियों में हड़कंप, घरघोड़ा विकासखंड में सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

यह विधिक आदेश विशेष रूप से रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड सहित उन ग्रामीण और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में भारी प्रशासनिक हलचल पैदा कर रहा है, जहां के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक अपनी मूल शालाओं को छोड़कर शहरी क्षेत्रों के कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कई कर्मचारी तो बिना किसी वैध और विधिक आदेश के भी वर्षों से दूसरे कार्यालयों में केवल आपसी सांठगांठ के भरोसे जमे हुए हैं।

अब जिला शिक्षा कार्यालय रायगढ़ द्वारा संचालनालय के निर्देशानुसार ऐसी अवैध सूचियों को विधिक रूप से तैयार करने की विसर्जन प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई है। अब क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और पालकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इन रसूखदार शिक्षकों के खिलाफ क्या विधिक दंडात्मक कार्रवाई करता है और कब तक इन्हें वापस बच्चों को पढ़ाने के लिए मूल स्कूलों में भेजा जाता है।

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