रायपुर/आरंग। Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी मानी जाने वाली महानदी आज संकट के दौर से गुजर रही है—और इस संकट की जड़ है रायपुर जिले की आरंग तहसील के ग्राम निसदा में संचालित हो रहे अवैध पत्थर खदान। ग्रामीणों की ओर से दी गई विस्तृत शिकायत में यह खुलासा हुआ है कि कैसे खनन माफिया नियमों को ताक पर रखकर नदी के पेट में ज़हर भरने पर तुले हैं।
5 गुना ज्यादा खनन, पर्यावरण की धज्जियाँ
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन खदानों को सीमित क्षेत्रफल के लिए स्वीकृति मिली थी, वे अब उससे पांच गुना अधिक क्षेत्र में अवैध खुदाई कर रहे हैं। बिना पर्यावरणीय स्वीकृति और रॉयल्टी के खदानें धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं। इससे न केवल शासन को प्रतिदिन 30 लाख रुपए से अधिक के राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि ग्राम पंचायतों को मिलने वाली अनिवार्य राशि भी नहीं मिल पा रही।
महानदी में पत्थर का कचरा, 5 किमी तक पटाई
खदान संचालक खनन से निकले वेस्ट मटेरियल को सीधे महानदी में डंप कर रहे हैं। लगभग 5 किलोमीटर तक नदी को पाट दिया गया है, जिससे नदी का बहाव अवरुद्ध हो रहा है और बारिश में गाँव में बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ गया है। किसानों की 400 एकड़ से अधिक फसलें प्रभावित हो चुकी हैं। नदी के किनारे की निजी ज़मीन भी कटाव का शिकार हो रही है।
नियमों की खुलेआम अनदेखी
वर्ष 2013 में लागू छत्तीसगढ़ भू-राजस्व सहिता की धारा 337(3) के तहत शासकीय भूमि पर नई खदान की अनुमति निषेध है। बावजूद इसके 2008-09 की स्वीकृतियों का हवाला देकर 2016 से 2019 के बीच 5 नई खदानें स्वीकृत की गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे सिस्टम में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत है और सब कुछ पैसे के दम पर चल रहा है।
पेड़ों की कटाई, पशु चरागाह का नाश
खनन क्षेत्र के आसपास के 500 से ज्यादा पेड़ अवैध रूप से काटे गए हैं, वो भी बिना वन विभाग की अनुमति के। खदानें पशु चरागाह की ज़मीन पर चल रही हैं, जिससे ग्रामीणों के मवेशियों के लिए चारा संकट गहराता जा रहा है। किसानों को फसल नुकसान और पशुओं को चारे की कमी से दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
धार्मिक स्थल, रेलवे लाइन और सिंचाई नहर भी खतरे में
सिर्फ पर्यावरण नहीं, सुरक्षा और सामाजिक ढांचे पर भी संकट मंडरा रहा है। खदानों से महज 10-25 मीटर की दूरी पर धार्मिक स्थल, मुक्तिधाम, रेलवे ब्रिज और सिंचाई नहर स्थित हैं। वेस्ट मटेरियल से इन सभी क्षेत्रों पर खतरा बढ़ गया है। नहरों की सड़कों की हालत खस्ताहाल हो चुकी है, जिससे ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।
ग्रामवासियों की मांग: खदान लीज तत्काल रद्द की जाए
ग्राम निसदा के निवासियों ने इस विषय में कलेक्टर रायपुर और खनिज विभाग को कई बार ज्ञापन सौंपा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि अगर खदानों पर 50-50 लाख का जुर्माना भी लगे तो भी यह कम होगा। उन्होंने सभी खदानों की लीज निरस्त करने, सीमांकन की जांच कराने, और महानदी को मलबा मुक्त कराने की मांग की है।
अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर समस्या पर संज्ञान ले और छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी को विनाश से बचाया जाए। वरना आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।












