Wednesday, August 26, 2026
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Mahakal Bhasma Aarti : महाकाल की भस्म आरती में उमड़ी आस्था, ब्रह्म मुहूर्त में गूंजा हर-हर महादेव

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उज्जैन; विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में तड़के संपन्न हुई भस्म आरती ने एक बार फिर सनातन आस्था और अध्यात्म की अद्भुत छटा बिखेरी। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह करीब 4 बजे जैसे ही गर्भगृह के द्वार खुले, मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय महाकाल” के जयकारों से गूंज उठा। चारों ओर श्रद्धा, साधना और भक्ति का ऐसा वातावरण बना कि उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

वैदिक विधि से हुआ महाकाल का अभिषेक

भस्म आरती से पूर्व मंदिर के पुजारियों और आचार्यों ने भगवान महाकाल का शास्त्रोक्त पूजन किया। सबसे पहले जल से अभिषेक हुआ, इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से पंचामृत अभिषेक संपन्न कराया गया। रुद्र पाठ और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गर्भगृह में दिव्य ऊर्जा का संचार हुआ, जिससे वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक हो गया।

भस्म श्रृंगार में छिपा जीवन का गूढ़ संदेश

अभिषेक के पश्चात बाबा महाकाल का भस्म श्रृंगार किया गया। भस्म को सनातन परंपरा में त्याग, वैराग्य और जीवन की नश्वरता का प्रतीक माना जाता है। इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालु नतमस्तक हो गए और कई भक्तों की आंखें नम हो उठीं। भक्तों ने सुख, शांति और मोक्ष की कामना की।

ध्यान और साधना में डूबा मंदिर परिसर

भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर क्षेत्र ध्यान, जप और साधना के भाव में लीन नजर आया। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस आरती के दर्शन से मन को अद्भुत शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। कई भक्त इसे केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण का मार्ग मानते हैं।

सनातन परंपरा की जीवंत झलक

महाकाल की भस्म आरती भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की एक अनूठी पहचान है। यह अनुष्ठान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को अध्यात्म, प्रकृति और जीवन मूल्यों से जोड़ता है तथा सादगी और वैराग्य के माध्यम से संतुलित जीवन का संदेश देता है।

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