Chhattisgarh Government : रायपुर। बस्तर अंचल की समृद्ध लोकपरंपराओं और जनजातीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में बेहद भव्य रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक लेकर आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की। इस वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन 10 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में संपन्न होगा, जिसमें जनपद, जिला और संभाग स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इस बार विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 की जाए, ताकि बस्तर के पारंपरिक नृत्य, गीत, वाद्ययंत्रों के साथ-साथ जनजातीय वेशभूषा, पूजा-पद्धति, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को भी प्रदर्शित किया जा सके। आयोजन की महत्ता को देखते हुए इस बार विभिन्न देशों के भारतीय राजदूतों को भी आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री स्वयं दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में आयोजन के लोगो, थीम गीत और आधिकारिक वेबसाइट का विमोचन करेंगे। इस महाआयोजन का नोडल विभाग संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को बनाया गया है, जो बस्तर संभाग के सातों जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में गतिविधियों का संचालन करेगा।













