रायपुर : छत्तीसगढ़ में आज से एक बार फिर कर्मचारी आंदोलन तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर राज्य के करीब 4 लाख 50 हजार कर्मचारी आज से 31 दिसंबर तक हड़ताल और विरोध-प्रदर्शन करेंगे। फेडरेशन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में भी सरकार ने लंबित मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
सरकार पर उपेक्षा का आरोप
फेडरेशन पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की जायज मांगें लंबे समय से लंबित हैं। कई बार ज्ञापन सौंपे गए, बैठकें और संवाद भी हुए, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी अनदेखी के विरोध में कर्मचारियों ने निर्णायक आंदोलन का रास्ता चुना है।
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11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) देने की मांग शामिल है। इसके अलावा 2019 से लंबित DA एरियर्स को GPF खाते में समायोजित करने, पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग भी प्रमुख है।
पदोन्नति और नियमितीकरण पर जोर
फेडरेशन ने चार स्तरीय समयमान वेतनमान, सहायक शिक्षकों और पशु चिकित्सा अधिकारियों को त्रिस्तरीय वेतनमान, नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित वेतन और पदोन्नति देने की मांग उठाई है। साथ ही अनुकंपा नियुक्ति को निःशर्त लागू करने और 10 प्रतिशत सीलिंग समाप्त करने की भी मांग की गई है।
सेवानिवृत्ति आयु और कैशलेस सुविधा
कर्मचारियों ने अन्य भाजपा शासित राज्यों की तरह कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने, अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिवस करने और सेवा गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से करने की मांग रखी है। इसके अलावा पंचायत सचिवों के शासकीयकरण और संविदा, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की भी मांग आंदोलन में शामिल है।











