C.G News : Chhattisgarh में धान खरीदी का रिकॉर्ड! लेकिन… किसानों को परेशानी समझने में ‘साय सरकार’ फेल

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dhaan kharidi
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी रिकॉर्ड

निशानेबाज़ न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ में खरीफ धान खरीदी (Dhan Kharidi 2025) का अभियान 15 नवंबर से शुरू होने के बाद तेजी पकड़ रहा है। बलौदा बाजार जिले में अब तक 15,11,578 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। मिलरों द्वारा धान उठाव की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है ताकि समितियों में भंडारण क्षमता पर दबाव न पड़े।

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस साल ‘टोकन तुंहर हाथ’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिससे किसानों को टोकन जारी करने की प्रक्रिया पारदर्शी और सरल बन सके। प्रशासन ने ई-केवाईसी और डिजिटल पंजीयन अनिवार्य किया है, जिससे किसानों की पहचान सुनिश्चित हो और डुप्लीकेशन रोका जा सके।

कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया कि खरीदी कार्य सुचारू रूप से चल रहा है और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समितियों में नियमित निगरानी की जा रही है।

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महासमुंद में किसान ने उठाया घातक कदम
लेकिन इस सफलता के बीच महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड में किसान मनबोध गाड़ा ने टोकन न कट पाने की समस्या से परेशान होकर अपने जीवन को खतरे में डाल दिया। मनबोध पिछले तीन दिनों से च्वाइस सेंटर में टोकन कटाने की कोशिश कर रहे थे।

घटना के दौरान ग्रामीणों और पुलिस की मदद से मनबोध को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में रायपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। मनबोध 65 साल के हैं और उनकी बेटी की शादी चार महीने बाद होने वाली है। परिवार का कहना है कि धान बेचने पर मिलने वाला पैसा शादी के खर्च के लिए निर्धारित था।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की परेशानियों के प्रति प्रशासन की चुप्पी “आपराधिक” है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से टोकन लेने में दिक्कत हो रही है।

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उपलब्धियों और चुनौतियों का मिश्रण
हालांकि सरकार की कोशिशें और उपलब्धियां भी इस कहानी का हिस्सा हैं। राज्य में धान खरीदी में पारदर्शिता और डिजिटल प्रक्रिया लागू करना और अवैध धान जब्त करना निश्चित रूप से सकारात्मक कदम हैं। बलौदा बाजार में अब तक 7,840 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका है, और प्रशासन ने 2,664.54 क्विंटल अवैध धान जब्त कर कार्रवाई की है।

वहीं, किसान मनबोध की आत्मघाती कोशिश यह दर्शाती है कि डिजिटल प्रक्रिया और ऐप के बावजूद भी जमीनी स्तर पर किसानों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को चाहिए कि इस तरह की तकनीकी गड़बड़ियों और स्थानीय परेशानियों को तुरंत दूर करे।

सरकार का यह संदेश किसानों के लिए स्पष्ट है: धान खरीदी का अभियान बड़े पैमाने पर सुचारू रूप से चल रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन को सुनिश्चित करना होगा कि किसी किसान की तकलीफ उसकी जिंदगी को खतरे में न डाले।

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