बालोद। ग्राम अरमुरकसा ब्लॉक डौंडी की जय मां लक्ष्मी समूह की 40 बहनें आज दर्द से कराह रही हैं। उनका कहना है कि जिला कलेक्टर की लापरवाही ने उनकी मेहनत और आत्मनिर्भरता को बर्बाद कर दिया। रीपा की चिक्की इकाई, जो कभी 40.57 लाख रुपये का उत्पादन और 23.88 लाख रुपये की बिक्री करती थी, हर माह लगभग 53 हजार रुपये का मुनाफा देती थी। यह इकाई इन गरीब बहनों के लिए आजीविका और बच्चों की हंसी का सहारा थी।
महिलाओं ने बताया कि अब वर्क ऑर्डर बंद होने और इकाई ठप होने के कारण उनके घरों में भूख, कर्ज और मायूसी का साया मंडरा रहा है। बच्चे स्कूल छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं और परिवारों में मातम है। बहनों का कहना है कि उनकी मेहनत और संघर्ष से जो जीवन उन्होंने बनाया था, प्रशासन की बेरुखी और घिनौनी विफलता ने सब कुछ छीन लिया।
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महिलाओं ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अपील करते हुए कहा कि रीपा इकाई को फिर से चालू किया जाए और उन्हें जीने का मौका दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह अन्याय अब बर्दाश्त नहीं होगा और वे न्याय की लड़ाई लड़ेंगी।
सुमन जगमायक, जो साड़ी पहने हुए हैं, और ऊषा बाई, जो बगल में चश्मा लगाए खड़ी हैं, ने कहा कि उनकी मेहनत से बनी इकाई ठप होने के कारण परिवारों की स्थिति बेहद खराब हो गई है। महिलाओं का कहना है कि उनका संघर्ष केवल आत्मनिर्भरता के लिए ही नहीं बल्कि बच्चों की हंसी और परिवार की खुशियों के लिए भी है।
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बालोद की ये बेटियां प्रशासन से न्याय की मांग कर रही हैं और उनका कहना है कि जब तक इकाई चालू नहीं होगी, उनकी चीखें और आवाज़ न्याय की पुकार करती रहेंगी।











