CG NEWS : हाईकोर्ट का अहम फैसला: बिना सबूत अफेयर के आरोप मानसिक क्रूरता, डॉक्टर पति को मिला तलाक, पत्नी को 25 लाख गुजारा भत्ता

Sanjay Sahu
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CG NEWS : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉक्टर दंपती के बीच चल रहे तलाक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस सबूत के जीवनसाथी पर अवैध संबंधों के आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने डॉक्टर पति की तलाक याचिका स्वीकार करते हुए पत्नी के आरोपों को बेबुनियाद माना है।

CG NEWS : हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें तलाक की अर्जी खारिज कर दी गई थी। साथ ही कोर्ट ने डॉक्टर पत्नी को एकमुश्त 25 लाख रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया है। यह राशि पति को छह महीने के भीतर अदा करनी होगी।

CG NEWS : कोर्ट के समक्ष पति की ओर से दलील दी गई कि पत्नी का व्यवहार शादी के कुछ समय बाद ही अपमानजनक और संदेहपूर्ण हो गया था। वह छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करती थी, मांग में सिंदूर लगाने और मंगलसूत्र पहनने से इनकार करती थी। पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी ने उस पर जानलेवा हमला किया और बिना आधार अवैध संबंधों के आरोप लगाकर मानसिक प्रताड़ना दी।

CG NEWS : मामले के अनुसार, सारंगढ़ निवासी डॉक्टर की शादी वर्ष 2008 में रायगढ़ में भिलाई की रहने वाली महिला से हुई थी। पत्नी भी पेशे से डॉक्टर है। शादी के बाद उनकी एक बेटी हुई, लेकिन कुछ वर्षों बाद दांपत्य संबंधों में दरार आ गई और वर्ष 2014 से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं।

CG NEWS : पति ने दुर्ग के फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी ने अपने लिखित बयान में पति के किसी अन्य महिला डॉक्टर से अवैध संबंध होने का गंभीर आरोप लगाया था, लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी।

CG NEWS : हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि एक शिक्षित पत्नी द्वारा बिना सबूत पति के चरित्र पर सवाल उठाना मानसिक क्रूरता का गंभीर रूप है। कोर्ट ने यह भी माना कि भले ही अप्रैल 2019 में दोनों साथ में फिल्म देखने गए हों, लेकिन लगातार लगाए गए आरोपों से पति को मानसिक पीड़ा पहुंची है।

CG NEWS : अंततः हाईकोर्ट ने क्रूरता के आधार पर तलाक मंजूर कर लिया। साथ ही बेटी के भविष्य और आगे की कानूनी लड़ाइयों से बचने के उद्देश्य से पत्नी को 25 लाख रुपये की एकमुश्त गुजारा भत्ता राशि देने का आदेश पारित किया गया है।

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