CG News : मीनू साहू/बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के हथौद-करहीभदर गाँव में इस वर्ष गोवर्धन पूजा का पर्व अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्राकृतिक जुड़ाव की गहरी छाप छोड़ने वाला उत्सव बन गया। ग्रामीणों ने पूरी उत्साह और परंपरा के साथ इस त्योहार में हिस्सा लिया, जहाँ बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की और पूरे वातावरण को भक्ति और उल्लास से सराबोर कर दिया।
गौ माता की आराधना और प्रतीकात्मक गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा के दिन की शुरुआत हथौद और करहीभदर गाँव के निवासियों ने पारंपरिक गौ माता की आराधना के साथ की। सुबह-सुबह गौशालाओं और घरों में गायों की पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद पारिवारिक भोजन का आयोजन हुआ। इस दौरान ग्रामीणों ने घर-आंगन में गोबर इकट्ठा कर प्रतीकात्मक रूप से गोवर्धन पर्वत का निर्माण किया और उसकी पूजा की। गोबर से बने इस पर्वत की परिक्रमा के दौरान महिलाओं ने मंगल गीत गाए, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। इस प्रतीकात्मक पूजा में बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और उत्सव के रंग को और गहरा किया।
CG News : बुजुर्गों ने किया मौसम और फसल का अनुमान
इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीणों का प्राकृतिक से जुड़ाव रहा। गाँव के बुजुर्गों ने परंपरानुसार मौसम की दिशा और विभिन्न संकेतों के आधार पर आने वाले वर्ष में फसल की पैदावार और मानसून का अनुमान लगाया। यह रस्म उनकी वर्षों पुरानी कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाती है। पर्व के दौरान पटाखों, पारंपरिक दीपों की रोशनी और लोक गीतों की मधुर धुन से पूरे गाँव का माहौल जीवंत हो गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को बधाई दी और सामाजिक सौहार्द का परिचय दिया।
सुहाई बांधने की रस्म ने बढ़ाया श्रद्धा का आयाम
गोवर्धन पूजा के इस उत्सव में सुहाई बांधने की रस्म ने श्रद्धालुओं के बीच आस्था और श्रद्धा को एक नया आयाम दिया। यह पारंपरिक रस्म क्षेत्र की सांस्कृतिक विशिष्टता को दर्शाती है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं रेड क्रॉस प्रदेश अध्यक्ष तोमन साहू (सफेद कपड़ा पहने हुए) ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व हमें प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। वहीं, ग्रामीण गैंदलाल खुर्सियांम (बैंगनी हाफ शर्ट पहने हुए) ने बताया कि यह त्योहार हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है और सामूहिक रूप से खुशियाँ मनाने का मौका देता है।
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सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
कुल मिलाकर, बालोद जिले के इन गाँवों में आयोजित गोवर्धन पूजा का यह कार्यक्रम केवल धार्मिक परंपराओं तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का काम किया। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास और उत्साह ने इस त्योहार को खास बना दिया, जो छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़े लोक जीवन और अटूट आस्था को प्रदर्शित करता है।











