CG News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर पुलिस विभाग में एएसआई ढोलाराम मरकाम पर कथित वसूली के आरोपों को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। सिम्स चौकी में पदस्थापना के दौरान उन पर यूपीआई के जरिए पैसे लेने के आरोप लगे थे। शिकायत सामने आने के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि, कुछ दिनों बाद उनकी बहाली कर मस्तूरी थाने में पोस्टिंग दे दी गई। वहां भी वसूली की शिकायत सामने आने के बाद उन्हें लाइन अटैच किया गया।
CG News: अब मामले में जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन अंतिम कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जांच रिपोर्ट भेजे जाने के बाद भी कार्रवाई का इंतजार क्यों किया जा रहा है?

नवंबर 2025 में सिम्स चौकी में थे पदस्थ
जानकारी के अनुसार, नवंबर 2025 में एएसआई ढोलाराम मरकाम सिम्स चौकी प्रभारी के रूप में पदस्थ थे। इस दौरान उन पर शव का पोस्टमार्टम कराने के नाम पर कथित वसूली के आरोप लगे। लोरमी क्षेत्र के एक युवक ने शिकायत में आरोप लगाया कि परिजन का जल्द पोस्टमार्टम कराने के लिए 20 हजार रुपये लिए गए थे। शिकायत के मुताबिक, यह रकम साइकिल स्टैंड संचालक के यूपीआई के माध्यम से ली गई थी।
इसी दौरान कोटा क्षेत्र के रिगरिगा निवासी एक अन्य युवक ने भी आरोप लगाया कि उसके पिता का शव सौंपने के लिए 500 रुपये मांगे गए थे। शिकायतें सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू हुई और एसएसपी ने एएसआई को निलंबित कर दिया।

बहाली के बाद दूसरी पोस्टिंग, वहां भी आई शिकायत
निलंबन के कुछ दिनों बाद एएसआई को बहाल कर मस्तूरी थाने में पदस्थ किया गया। इस दौरान मुर्गी फार्म संचालक से भी कथित वसूली की शिकायत सामने आई। इसके बाद उन्हें लाइन अटैच कर दिया गया।
यूपीआई के माध्यम से कथित वसूली के मामले में जांच के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने कार्रवाई के लिए रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी। हालांकि, अब तक इस मामले में अंतिम विभागीय कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
CG News: जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई का इंतजार क्यों?
CG News: एक ही पुलिसकर्मी के खिलाफ अलग-अलग समय पर शिकायतें सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पहले निलंबन, फिर बहाली और दूसरी पोस्टिंग के दौरान दोबारा शिकायत सामने आने के घटनाक्रम ने मामले को चर्चा में ला दिया है। अब सवाल यह है कि जांच रिपोर्ट पर उच्च अधिकारियों ने क्या निर्णय लिया है? क्या विभागीय जांच की प्रक्रिया अभी लंबित है या कार्रवाई को लेकर कोई फैसला हो चुका है? यदि रिपोर्ट पर निर्णय नहीं हुआ है, तो इसकी वजह क्या है? फिलहाल, मामले में अंतिम कार्रवाई को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।