Sunday, August 16, 2026
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CG News : अडानी कंपनी ने आधी रात किसानों की खड़ी फसल पर चलवाया बुलडोजर, फर्जी ग्रामसभा दस्तावेजों पर ज़मीन कब्जे का आरोप, देखे वीडियो…

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CG News :  उदयपुर/साल्ही। छत्तीसगढ़ के उदयपुर थाना क्षेत्र के ग्राम साल्ही में शुक्रवार आधी रात अडानी समूह पर जबरन ज़मीन कब्जा करने और किसानों की खड़ी फसल को नष्ट करने का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का दावा है कि अडानी कंपनी ने फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव के आधार पर खदान के लिए भूमि अधिग्रहण किया और रात 12 बजे के करीब बिना किसी पूर्व सूचना के कई बुलडोजर भेजकर खेतों को रौंद डाला।

सबसे ज़्यादा नुकसान किसान आनंद राम कुसरो को

ग्रामीण आनंद राम कुसरो, जिनकी फसल पूरी तरह तबाह हो गई, ने बताया: “पूरे सीजन की मेहनत से फसल उगाई थी, और यह मेरी आजीविका का इकलौता साधन थी। बिना सूचना, बिना ग्रामसभा के हमें उजाड़ दिया गया।” अन्य जिन किसानों की ज़मीन पर बुलडोजर चलाया गया उनमें बुधराम उइके, भगवती राम, प्रकार उइके, पवन कुसरो और संत राम कुसरो शामिल हैं।

“फर्जी ग्रामसभा दस्तावेजों” का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि अडानी समूह ने जिस जमीन पर कार्यवाही की, वह फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों के आधार पर की गई। ग्राम पंचायत साल्ही में इस तरह की कोई बैठक या निर्णय लिया ही नहीं गया था। किसानों को इस संबंध में कोई अधिसूचना या कानूनी जानकारी भी नहीं दी गई थी।

ग्रामीणों में रोष, नेता बोले- “डर के कारण किया गया हमला”

ग्राम साल्ही के युवा नेता और सामाजिक कार्यकर्ता राजा जयसिंह कुसरो ने कहा: “यह कार्रवाई डर और सत्ता के दुरुपयोग की प्रतीक है। अडानी कंपनी किसानों से डरती है क्योंकि फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए परसा कोल माइंस खोली गई। इसमें भाजपा की संलिप्तता भी नजर आती है।” उन्होंने सरकार से फर्जी ग्रामसभा दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच की मांग की और कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो आंदोलन छेड़ा जाएगा।

सामाजिक संगठनों का समर्थन, आंदोलन की चेतावनी

इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है। कई सामाजिक संगठन और स्थानीय जनप्रतिनिधि किसानों के समर्थन में सामने आ रहे हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि:

  • अडानी समूह की कार्यवाही की निष्पक्ष जांच हो
  • किसानों को मुआवजा और न्याय मिले
  • दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए

सरकार की चुप्पी सवालों के घेरे में

अब तक न तो अडानी समूह की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है और प्रशासन भी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। किसान संगठनों ने चेताया है कि यदि जांच नहीं हुई तो क्षेत्र में व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

यह मामला न केवल किसानों की आजीविका से जुड़ा है, बल्कि यह ग्रामसभा, स्थानीय स्वशासन और भूमि अधिकारों की वैधता पर भी गंभीर सवाल उठाता है। 

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