फकरे आलम खान/बचेली। छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा समिति बचेली के तत्वाधान में, एनएमडीसी प्रबंधन बचेली और बचेली नगरवासियों के सहयोग से 48वां दशहरा पर्व भव्य रूप से मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना और राम की झांकी से हुई, जिसमें राम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान के चरित्रों का जीवंत चित्रण किया गया।
रावण दहन के दौरान हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिक और ग्रामीण शामिल हुए। उन्होंने आतिशबाजी, झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे:
- श्रीधर कोडाली, परियोजना प्रमुख बीआईओएम बचेली
- महेश एस. नायर, महाप्रबंधक मानव संसाधन बीआईओएम बचेली
विशिष्ट अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्ति:
- जिला प्रशासन और सभी विभागाध्यक्ष
- कमांडेंट सीआरपीएफ
- जागेश्वर प्रसाद, अध्यक्ष एस.के.एम.एस. यूनियन
कार्यक्रम की अध्यक्षता की: राजू जायसवाल, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद बचेली।
समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार साहू ने स्वागत उदबोधन दिया। अतिथियों ने दशहरा पर्व के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया और पुतला एवं झांकी निर्माण में लगे सदस्यों को सालाना मोमेंटो प्रदान किया।
समिति के महासचिव महेंद्र कुमार साहू ने बताया कि इस बार दशहरा के लिए एक माह पूर्व तैयारी शुरू की गई थी। इस बार 55 फीट ऊंचा रावण पुतला और मनमोहक झांकी बनाई गई। रायपुर और दुर्ग से आए विशेष आतिशबाजों द्वारा प्रस्तुत प्रकाशमय आतिशबाजी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
गौरतलब है कि तेज बारिश के बावजूद जनसमुदाय का उत्साह कम नहीं हुआ और लोग देर रात तक कार्यक्रम में डटे रहे। 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जी की जयंती थी, इसलिए मैदान में लगने वाले दुकानों में मांसाहारी व्यंजन प्रतिबंधित थे। समिति ने शपथ पत्र भरकर ही दुकानों का आबंटन किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियां समिति के सांस्कृतिक सचिव कुशल सिंह साहू और उनकी टीम द्वारा दी गईं। मंच संचालन का कार्य कीर्तन साहू और लोकेश कुमार ने किया। छत्तीसगढ़ महिला समिति ने भी इस आयोजन में भरपूर सहयोग दिया। धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष इंद्रजीत हिरवानी ने किया।
कार्यक्रम के अंत में रावण का विशाल पुतला दहन और आकर्षक आतिशबाजी की गई, जिसे देखकर उपस्थित जनसमूह रोमांचित हो उठे। यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम बना बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी साबित हुआ।











