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CG NEWS: गेरुपानी पंचायत में पीडीएस दुकान में पहुंचा 250 बोरी ‘पाखंड चावल’ सरपंच–खाद्य अधिकारी ने पंचनामा तैयार कर जांच जारी

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CG NEWS: गौरी शंकर गुप्ता /घरघोड़ा/(रायगढ़)। गेरूपानी पंचायत में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब पीडीएस दुकान में वितरण के भंडारण किए गए चावल में भारी अनियमितता देखने को मिली। पीडीएस संचालक जब नए प्रकार के चावल को देखने पहुंचे, तो उसकी गुणवत्ता और बनावट देखकर वे हैरान रह गए। संचालक ने तत्काल ही सरपंच को इसकी जानकारी दी। सरपंच की मौजूदगी में मौके पर पंचनामा तैयार किया गया और मामले की सूचना खाद्य विभाग को भेजी गई।

CG NEWS: सूचना पाकर खाद्य अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान चावल की प्रकृति और गुणवत्ता संदेहास्पद पाई गई। निरीक्षण में कुल 250 बोरी ‘पाखंड चावल’ बरामद हुआ, जिसकी बनावट और रंग पूरी तरह असामान्य थे। चावल की गुणवत्ता ने खड़े किए बड़े सवाल गांव के लोगों और संचालक के अनुसार यह चावल सामान्य पीडीएस चावल जैसा न तो दिख रहा था और न ही उसकी खुशबू या बनावट मेल खा रही थी।

CG NEWS: सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है

यह चावल आया कहां से?

किस तरह से यह पीडीएस दुकान तक पहुंच गया?

क्या संबंधित विभागीय अधिकारी इस बड़े खेल से अनजान हैं?

या फिर यह सब किसी सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा है?

चावल की गुणवत्ता से प्रतीत हो रहा है कि यह खाद्य योग्य नहीं है,

जिससे हजारों हितग्राहियों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता था।

CG NEWS: सरपंच ने की त्वरित कार्रवाई, खाद्य अधिकारी ने की जांच सरपंच ने मौके पर पहुंचकर पूरा प्रकरण देखा और तत्काल पंचनामा बनवाया। खाद्य अधिकारी ने जांच कर सभी 250 बोरियों को रोकते हुए कहा कि—

चावल संदिग्ध गुणवत्ता का है

यह सरकारी आपूर्ति जैसा नहीं दिखता

इसकी तुरंत रिपोर्ट ब्लॉक और जिला स्तर पर भेजी जाएगी

अधिकारी ने यह भी कहा कि फिलहाल बोरियों को वापस करने की प्रक्रिया जारी है।

हितग्राहियों में आक्रोश – ऐसा चावल कैसे पकाएँगे?”

गांव के हितग्राहियों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि—

यह चावल न तो खाने लायक दिख रहा है

न इसके दाने सामान्य हैं

इसे पकाना भी लगभग असंभव है

यह जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है

ग्रामीणों ने पीडीएस व्यवस्था और सप्लाई चैन पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।

क्या विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध?

पूरा मामला कई पहलुओं पर भारी संदेह पैदा कर रहा है। जैसे—

क्या जिला खाद्य विभाग ने चावल की गुणवत्ता जांच नहीं कराई?

यदि कराई तो ऐसी खामी पकड़ में क्यों नहीं आई?

क्या परिवहन या गोदाम स्तर पर किसी ने जानबूझकर पाखंड चावल सप्लाई किया?

क्या यह एक बड़ा रैकेट है जो निम्न गुणवत्ता का चावल पीडीएस में खपाने की कोशिश कर रहा है?

क्या यह पूरे ब्लॉक में सप्लाई होने वाला था?

या गेरूपानी का पहला खुलासा है?

ये सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं और प्रशासनिक प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

जिला प्रशासन से विस्तृत जांच की मांग की जा रही है।

CG NEWS: खाद्य विभाग पहले चरण में चावल की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट तैयार करेगा।

CG NEWS: यदि लापरवाही साबित हुई तो सप्लायर, परिवहनकर्ता, गोदाम प्रभारी और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस तरह की सप्लाई को तुरंत रोका जाए और दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज हो। गेरुपानी पंचायत में पकड़ा गया यह “पाखंड चावल” पीडीएस सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान है। प्रशासन के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है कि आखिर इतना बड़ा घोटाला कैसे हुआ और कौन इसके पीछे है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि खाद्य विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और गंभीरता से कार्रवाई करता है।

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