नई दिल्ली: देश की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे संसद के बजट सत्र 2026 की शुरुआत बुधवार से होने जा रही है। सत्र का औपचारिक शुभारंभ लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ होगा। लेकिन इससे पहले ही राजनीतिक माहौल गर्मा चुका है और सरकार तथा विपक्ष के बीच टकराव के स्पष्ट संकेत दिखाई देने लगे हैं।
राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगा सत्र का आगाज
परंपरा के अनुसार, वर्ष के पहले संसद सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के संबोधन से होती है। इस दौरान सरकार अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं, विकास योजनाओं और आगामी एजेंडे का खाका पेश करती है। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा, जिस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
सर्वदलीय बैठक में दिखा सियासी टकराव
बजट सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी दलों ने ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा की मांग रखी, जिसे सरकार ने अस्वीकार कर दिया। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि किसी कानून के लागू हो जाने के बाद उस पर पुनर्विचार की कोई गुंजाइश नहीं होती।
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विपक्ष ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल
विपक्षी दलों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि सर्वदलीय बैठक में विधायी एजेंडा साझा नहीं किया गया और केवल औपचारिकता निभाई गई। विपक्ष का कहना है कि बिना स्पष्ट जानकारी के सार्थक चर्चा संभव नहीं है।
कांग्रेस का आक्रामक रुख तय
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस बजट सत्र में सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरेगी। पार्टी की प्राथमिकताओं में विदेश नीति, रुपये की गिरती कीमत, अमेरिकी टैरिफ, मनरेगा और किसानों से जुड़े सवाल शामिल हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार आखिरी समय में विधेयक लाकर चर्चा के अवसर सीमित कर देती है।
क्षेत्रीय दलों ने भी उठाई आवाज
क्षेत्रीय दलों ने भी अपने-अपने मुद्दों को प्रमुखता से रखा है। बीजू जनता दल ने ओडिशा के किसानों की समस्याओं और फसल बीमा में देरी का मुद्दा उठाया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
हंगामेदार रहने के आसार
कुल मिलाकर, बजट सत्र 2026 के दौरान संसद में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव की पूरी संभावना है। एक ओर सरकार अपने विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रही है, वहीं विपक्ष आर्थिक और नीतिगत मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।













