नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण से ऑटो सेक्टर को इस बार बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट 2026-27 ने ऑटो इंडस्ट्री को निराश कर दिया है। जहां आम जनता, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों के लिए कई घोषणाएं की गईं, वहीं ऑटो सेक्टर पूरी तरह नजरअंदाज होता दिखा।
ऑटो सेक्टर की उम्मीदें रहीं अधूरी
बजट से पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार ऑटो उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ईवी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और टैक्स स्ट्रक्चर में कुछ राहत दे सकती है।
हालांकि, बजट भाषण में वाहनों पर टैक्स कटौती, ऑटो पार्ट्स पर जीएसटी में राहत या किसी नई सब्सिडी का कोई जिक्र नहीं किया गया।
ईवी और हाइब्रिड कारों को नहीं मिला सपोर्ट
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री देश में लगातार बढ़ रही है, लेकिन उद्योग को उम्मीद थी कि सरकार इस बजट में ईवी को और सस्ता बनाने के लिए टैक्स में छूट या अतिरिक्त सब्सिडी का ऐलान करेगी।
इसके साथ ही हाइब्रिड कारों पर टैक्स घटाने की मांग भी लंबे समय से उठ रही थी, लेकिन बजट 2026 में इन दोनों सेगमेंट को कोई सीधी राहत नहीं मिली।
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लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर भी चुप्पी
ऑटो इंडस्ट्री चाहती थी कि सरकार स्थानीय सप्लायर्स और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए ऑटो पार्ट्स पर टैक्स कम करे।इससे ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलती, लेकिन बजट में इस दिशा में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निराशा
ईवी सेक्टर की एक बड़ी मांग थी कि चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष फंड या योजना लाई जाए।
उद्योग का मानना था कि अगर चार्जिंग नेटवर्क मजबूत किया जाता, तो ईवी अपनाने की रफ्तार और तेज हो सकती थी। लेकिन बजट 2026 में इस मुद्दे पर भी सरकार की ओर से कोई घोषणा नहीं हुई।
उद्योग में बढ़ी चिंता
बजट के बाद ऑटो सेक्टर से जुड़े संगठनों ने निराशा जताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार ईवी और ऑटो इंडस्ट्री को टैक्स राहत देती, तो यह सेक्टर रोजगार, निवेश और पर्यावरण के लिहाज से देश के लिए और फायदेमंद साबित हो सकता था।











