Breaking Mauganj : मऊगंज/अभय मिश्रा: मऊगंज कलेक्ट्रेट एक बार फिर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के आरोपों में घिर गया है। एक महिला वार्डन द्वारा कलेक्ट्रेट के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पंकज श्रीवास्तव पर कलेक्टर के नाम पर 1 लाख 12 हजार रुपए की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही, विभागीय आदेशों को दबाने और तामीली प्रक्रिया का उल्लंघन करने के आरोपों ने भी बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कलेक्टर संजय जैन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत हाई-लेवल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
कलेक्टर के नाम पर ली गई कथित रिश्वत और धमकी
वार्डन शकुंतला नीरत का आरोप है कि ‘काम कराने’ के बहाने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पंकज श्रीवास्तव ने उनसे दो किस्तों में कुल ₹1,12,000 की रिश्वत ली। जब काम नहीं हुआ और वार्डन ने पैसे वापस माँगे, तो आरोपी ने उनके पति को रात में पुराने बस स्टैंड पर बुलाकर धमकियाँ दीं। वार्डन शकुंतला नीरत ने इस पूरी घटना की शिकायत मऊगंज थाने में दर्ज कराई है।
कलेक्टर की सख्ती: अपर कलेक्टर को मिली जांच की जिम्मेदारी
मामला सामने आते ही, कलेक्टर संजय जैन ने अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत तुरंत सख्त कार्रवाई की। उन्होंने अपर कलेक्टर को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।
“चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर लगाए गए रिश्वत के आरोपों की जांच अपर कलेक्टर को सौंप दी गई है। दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। हम मामले की पूरी गहराई से जांच करवा रहे हैं।”
— संजय जैन (कलेक्टर मऊगंज)
प्रशासनिक लापरवाही और आदेशों को दबाने का आरोप
रिश्वत के आरोपों के साथ ही, यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और अनियमितताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। वार्डन शकुंतला नीरत का आरोप है कि:
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उन्हें छात्रावास प्रभार छोड़ने का आदेश (28 अगस्त को जारी) समय पर नहीं मिला, और नियमों के अनुसार डाकपाल के माध्यम से भी तामीली नहीं हुई। यह आदेश 6 सितंबर को दोपहर 12 बजे व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजा गया, जो विभागीय प्रक्रिया का खुला उल्लंघन है।
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इस देरी के कारण वार्डन को हाई कोर्ट जाना पड़ा, जहाँ से उन्हें 26 सितंबर को स्थगन आदेश मिला।
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उनके खिलाफ ₹6 लाख 67 हजार की रिकवरी का आदेश 14 नवंबर को जारी हुआ, लेकिन इसकी सूचना उन्हें 30 नवंबर को सोशल मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद व्हाट्सऐप से मिली। उन्हें न कोई नोटिस दिया गया और न ही जवाब देने का अवसर।
“मुझसे ₹1,12,000 रिश्वत ली गई और जब मैंने पैसे माँगे तो मेरे पति को धमकाया गया। इसके अलावा, मेरे खिलाफ आदेशों को दबाया गया और रिकवरी का नोटिस भी मीडिया में आने के बाद भेजा गया। यह सब एक बड़ी साज़िश है।”
— शकुंतला देवी नीरत (वार्डन)
कोर्ट आदेश के बाद भी 16 दिन क्यों दबा रहा आदेश?
मामले की सबसे बड़ी कड़ी यह है कि जब कलेक्टर ने कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए 14 नवंबर को निर्देश जारी कर दिए थे, तो विभागीय अधिकारियों ने 16 दिनों तक इसकी तामीली क्यों नहीं की? और क्यों यह आदेश तब जारी किया गया, जब मामला मीडिया में आ चुका था और कोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी कर दिया था?
“कलेक्टर के द्वारा जारी आदेशों को इतने दिनों तक दबा कर क्यों रखा गया? यह सीधे तौर पर कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।”
— अरुण कुमार मिश्रा (पूर्व मंडल संयोजक)
पूरे प्रकरण में रिश्वत, धमकी, आदेश तामीली में लापरवाही और विभागीय अनियमितताओं की कई परतें खुल गई हैं, जिसकी जांच अब तेज हो गई है।











