Biological Poisons : गुजरात ATS ने विफल की बड़ी आतंकी साज़िश: ISIS के निशाने पर था ‘रिसिन’ जैविक हथियार

VIKASH KHALKHO

Biological Poisons : गुजरात। हाल ही में गुजरात एटीएस द्वारा ISIS से जुड़े एक बड़े आतंकी साज़िश को नाकाम किया गया, जिसमें रिसिन (Ricin) नामक एक अत्यंत घातक जैविक जहर का इस्तेमाल करने की योजना थी। यह घटना रिसिन जैसे बायो-केमिकल वेपन की भयावहता और इसकी आसान उपलब्धता के कारण उत्पन्न होने वाले गंभीर खतरे को रेखांकित करती है।Ricin : bienfaits et vertus - Fleurance Nature

Biological Poisons :  रिसिन क्या है और यह कितना घातक है?
रिसिन एक प्राकृतिक प्रोटीन जहर है, जो आमतौर पर अरंडी के पौधे (Castor plant) के बीजों में पाया जाता है। यह जहर अरंडी के बीजों से तेल निकालने के बाद बचे हुए ‘कैस्टर केक’ (कचरे) से प्राप्त होता है।

  1. स्वरूप: यह एक सफेद पाउडर होता है जो गंधहीन और स्वादहीन होता है।
  2. घातकता: इसे दुनिया के सबसे घातक पदार्थों में से एक माना जाता है। यह शरीर की कोशिकाओं को अंदर से नष्ट कर देता है और प्रोटीन संश्लेषण (Protein Synthesis) को रोक देता है, जिससे कोशिकाएं मर जाती हैं।
  3. मात्रा: रिसिन की बहुत छोटी मात्रा भी जानलेवा हो सकती है। सांस लेने या इंजेक्शन के माध्यम से केवल 5 से 10 माइक्रोग्राम प्रति किलोग्राम वजन (लगभग चावल के एक दाने जितना) एक वयस्क व्यक्ति की जान ले सकती है।
  4. हमले का तरीका: इसे खाने, सांस लेने या इंजेक्शन के माध्यम से शरीर में डाला जा सकता है। यह संक्रामक (Contagious) नहीं है, लेकिन अगर इसे हवा या पानी में मिलाया जाए तो बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।Ricin Toxin (Ricinus Communis) - Bertin Environics

Biological Poisons : आतंकी हमले की साज़िश और रिसिन की उपलब्धता

  1. गुजरात में पकड़े गए ISIS के आरोपी ने कैस्टर ऑयल खरीदकर उसी के कचरे से रिसिन बनाने की कोशिश की थी। रिसिन को आतंकी हथियार बनाने के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
  2. आसान उपलब्धता: अरंडी का पौधा भारत सहित गर्म इलाकों में आसानी से उगता है और इसका बीज हर जगह उपलब्ध है। तेल निकालने के बाद बचा हुआ कचरा, जिसमें रिसिन होता है, भी आसानी से मिल जाता है।US woman admits testing homemade ricin on neighbours

Biological Poisons :  सरल निर्माण: विशेषज्ञों के अनुसार, बीजों को पीसकर, उबालकर और रसायनों (जैसे एसिड) से साफ करके घर पर भी रिसिन बनाना मुश्किल नहीं है। इसी आसानी के कारण आतंकी समूह इसे एक प्रभावी हथियार के रूप में देखते हैं।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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