Monday, September 28, 2026
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बिहार : कैबिनेट बैठक के बाद CM नीतीश ने दिया इस्तीफा! कौन होगा अगला मुख्यमंत्री… समझें यहां

NARENDRA MODI NITISH
NARENDRA MODI NITISH

पटना : बिहार की राजनीति ने आज यानी 17 नवंबर को एक बार फिर करवट ली। चुनावी नतीजों के तीन दिन बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफ़ा दे दिया, जिससे पूरा राजनीतिक माहौल गर्मा गया। राज्यपाल ने उन्हें नई सरकार बन जाने तक कार्यवाहक सीएम बने रहने का आग्रह किया। लेकिन अब हर तरफ सिर्फ एक ही सवाल—“बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन?”

बीजेपी की बड़ी जीत, लेकिन क्या सीएम पद छोड़ेगी?
14 नवंबर को आए नतीजों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पार्टी के पास रिकॉर्ड सीटें हैं और जनता का साफ जनादेश भी।इसलिए राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार बीजेपी दबदबा बनाए रखकर अपना सीएम बना सकती है।

लेकिन हालात इतने सरल नहीं…

जदयू की रणनीति और नीतीश की पुनर्वापसी की संभावना

जदयू के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक व्यापक सहमति बन चुकी है कि एनडीए की जीत के बावजूद शपथ नीतीश कुमार ही लेंगे।
कारण:

  • बीजेपी को यह भरोसा कि नीतीश के साथ सत्ता में स्थिरता बनी रहती है।
  • गठबंधन में छोटे दलों की सुविधा भी नीतीश के साथ अधिक है।
  • बिहार की राजनीति में नीतीश का जातीय-संतुलन मॉडल अभी भी सबसे कारगर माना जाता है।

सूत्रों के मुताबिक 20 नवंबर को नीतीश कुमार अपनी 10वीं शपथ ले सकते हैं।

बीजेपी में सीएम चेहरे को लेकर दो धड़ों में चर्चा

पार्टी के भीतर बिहार से उठी यह आवाजें भी तेज हैं कि—

  • “इतनी सीटें जीतकर भी सीएम क्यों न मिले?”
  • कई नेता चाहते हैं कि बिहार में अब पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी की सरकार बने।

हालांकि केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल नीतीश को ही उपयुक्त विकल्प मान रहा है। इसका मकसद यह भी बताया जा रहा है कि—
“2029 का रास्ता बिहार से गुजरता है, और नीतीश उस रणनीति का अहम हिस्सा हैं।”

गठबंधन का गणित: किसे कितनी हिस्सेदारी?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नई मंत्रिपरिषद में कुल 35–36 मंत्री होंगे।

  • बीजेपी: 15–16
  • जदयू: 13–14
  • LJP (R): 3
  • HAM: 1
  • RLM: 1

यह फॉर्मूला दर्शाता है कि सीएम चेहरा जदयू का, लेकिन पावर बैलेंस बीजेपी के पास।

क्या नया चेहरा भी आ सकता है?
कुछ राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि—
अगर बीजेपी ने अंतिम क्षण पर रणनीति बदली, तो वे नित्यानंद राय, सम्राट चौधरी या संजय जायसवाल जैसे नामों को आगे बढ़ा सकती है।लेकिन अभी तक किसी भी नेता के नाम पर आधिकारिक संकेत नहीं मिला।

अब लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, साख की भी

नीतीश कुमार पहले भी कई बार इस्तीफा देकर वापसी करते रहे हैं।ऐसे में राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि—“नीतीश बिहार की राजनीति में विकल्प नहीं, अनिवार्यता बन चुके हैं।”

अब 20 नवंबर पर टिकी हैं निगाहें
क्या नीतीश 10वीं बार इतिहास रचेंगे या बीजेपी कोई नया चेहरा पेश करेगी?बिहार की राजनीति इसी प्रश्न के इर्द-गिर्द घूम रही है।

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