भोपाल : राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में दो नवजात बच्चों को कचरे में फेंककर केरोसिन डालकर जलाने का मामला सामने आया है। शुरुआती जांच के अनुसार दोनों बच्चे जन्म से ही मृत थे। घटना ने अस्पताल की सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे की शुरुआत और फंदा
सूत्रों के मुताबिक, बच्चों को जन्म देने के बाद कचरे में रखकर आग लगा दी गई। यह घटना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं और नवजात देखभाल की प्रक्रिया पर भी गंभीर संकट का संकेत है।
पुलिस की जांच और DNA टेस्ट की तैयारी
हमीदिया अस्पताल ने अब 70 महिलाओं की डिटेल पुलिस को सौंपी हैं, जो हाल ही में अस्पताल में गर्भवती आई थीं। पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और संभवतः दोषी बच्चों के माता-पिता की पहचान के लिए DNA टेस्ट कराने का निर्णय लिया है।
DNA टेस्ट के जरिए सच्चाई सामने आएगी
जिन महिलाओं ने हाल ही में अस्पताल में प्रसव किया था, उनके DNA टेस्ट से यह स्पष्ट होगा कि दोनों मृत नवजात किसकी संतान थीं। पुलिस के अनुसार यह जांच सटीक और निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी ताकि मामले में किसी भी तरह का भ्रम न रह सके।
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अस्पताल और प्रशासन की जिम्मेदारी
इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए हैं। अस्पताल में न केवल नवजातों की देखभाल की जिम्मेदारी होती है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी भी जरूरी है।
समाज और कानून की प्रतिक्रिया
समाज में इस मामले को लेकर आक्रोश और चिंता है। बच्चों के साथ इस तरह का कृत्य न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि मानवता के खिलाफ भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल और पुलिस को मिलकर इस मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए ताकि दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जा सके।











