निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : भोपाल स्थित पुलिस रेडियो मुख्यालय में पदस्थ डीएसपी अनिता प्रभा शर्मा का मामला अब प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। उनके द्वारा दिए गए आवेदनों और पत्रों में कथित पक्षपात, मानसिक दबाव और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं।
छुट्टी को लेकर विवाद
डीएसपी अनिता प्रभा शर्मा ने जनवरी 2026 में नियमों के तहत Prefix और Suffix के साथ अवकाश के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि उनकी छुट्टी बिना किसी स्पष्ट कारण के रोक दी गई। इतना ही नहीं, अर्जित अवकाश (EL) को भी देर से स्वीकृति दी गई, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
ड्यूटी में भेदभाव के आरोप
मामले का दूसरा पहलू डायल-112 ड्यूटी से जुड़ा है। डीएसपी का आरोप है कि चार शिफ्टों में से केवल एक में ही उन्हें प्रभारी बनाया गया, जबकि अन्य शिफ्टों में निरीक्षकों को जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने इसे पूर्व नियोजित और पक्षपातपूर्ण बताया है।
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आवाज उठाने पर मिली चेतावनी
जब डीएसपी ने इन मुद्दों को लेकर अपनी बात रखी, तो वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके पत्र की भाषा को “अशिष्ट” और “अनुशासनहीन” बताते हुए उन्हें चेतावनी दे दी। साथ ही, उनके लिए विशेष प्रशिक्षण की सिफारिश भी की गई, जिससे विवाद और गहरा गया।
पत्र में लगाए गंभीर आरोप
डीएसपी ने विशेष पुलिस महानिदेशक को लिखे पत्र में कहा कि उन्हें जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों के अनुसार जानकारी देने के बावजूद उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जा रहे और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। साथ ही, उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से आधिकारिक पत्र को वायरल करने की भी बात कही गई है।
प्रशासन पर उठे सवाल
यह पूरा मामला अब इस सवाल को जन्म दे रहा है कि क्या अधिकारियों को अपनी समस्याएं उठाने का अधिकार है या इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा।फिलहाल यह मामला प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।











