Monday, March 30, 2026
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बड़वानी में स्कूल की कमी ने छीना बचपन, जंगलों में मवेशी चरा रहे 100 से ज्यादा बच्चे

बड़वानी: जिले की ग्राम पंचायत देवगढ़ से सामने आई तस्वीरें न सिर्फ झकझोरने वाली हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और सरकारी दावों पर भी गहरे सवाल खड़े करती हैं। यहां वह उम्र, जिसमें बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और कलम होनी चाहिए, उसी उम्र में वे लाठी और रस्सी थामे जंगलों में गाय, भैंस और बकरियां चराते नजर आ रहे हैं।

स्कूल नहीं, जिम्मेदारियां ही जिम्मेदारियां

देवगढ़ पंचायत जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां 100 से अधिक बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल जाने के बजाय घरेलू जिम्मेदारियों में उलझे हुए हैं। कोई खेतों में हाथ बंटा रहा है तो कोई पूरे दिन जंगल में मवेशियों की देखरेख कर रहा है। पढ़ाई और खेल-कूद की जगह मेहनत और जिम्मेदारियां इनके बचपन का हिस्सा बन चुकी हैं।

जंगल का रास्ता, जंगली जानवरों का डर

ग्रामीणों ने बताया कि इस क्षेत्र में कोई प्राथमिक या माध्यमिक स्कूल मौजूद नहीं है। नजदीकी सरकारी स्कूल लगभग 5 किलोमीटर दूर है, जहां तक पहुंचने के लिए घने जंगल से होकर गुजरना पड़ता है। रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है, जिस कारण माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं।

गरीबी भी बनी बड़ी बाधा

देवगढ़ के अधिकतर परिवार मजदूरी पर निर्भर हैं—रोज कमाते हैं, रोज खाते हैं। निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने की उनकी आर्थिक स्थिति नहीं है। सरकारी स्कूल ही उनके लिए एकमात्र विकल्प है, लेकिन जब वह भी पास में उपलब्ध न हो, तो बच्चों का स्कूल से दूर रहना मजबूरी बन जाता है।

सर्वे हुए, समाधान अब तक नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से स्कूल खोलने की मांग की गई। सर्वे भी हुए, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

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जिम्मेदारों का पक्ष

इस मामले में बीआरसी का कहना है कि संबंधित क्षेत्र में स्कूल खोलने को लेकर कई बार सर्वे किए गए हैं। विभाग द्वारा उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया जाता रहा है, लेकिन अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका है।

अगर समय रहते देवगढ़ पंचायत में स्कूल खोला जाए, तो सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवर सकता है और उनका बचपन मेहनत नहीं, शिक्षा और सपनों से जुड़ सकता है।

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