Tuesday, August 18, 2026
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C.G News : बालोद जंबूरी पर सियासी संग्राम, स्काउट-गाइड आयोजन बना सत्ता बनाम संगठन की जंग

रायपुर : राज्य में जहां आगामी 9 से 13 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले ‘राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी’ पर विवाद अब और भी गहरा गया है। कांग्रेस और विपक्षी खेमे ने जंबूरी विवाद के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर पुराने मामलों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। नेताओं का दावा है कि ये आरोप केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि दस्तावेज़ों और जांच रिपोर्ट पर आधारित हैं। हालांकि निशानेबाज न्यूज़ इन दस्तावेजों की पुष्टि नहीं करता है ।

आरोपों के अनुसार, गजेंद्र यादव वर्ष 2014 से 2019 तक भारत स्काउट एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के राज्य आयुक्त रहे। इसी कार्यकाल के दौरान स्काउट-गाइड के फंड के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत सामने आई थी।

सरकारी जांच में उठे थे फंड उपयोग पर सवाल

विपक्ष का कहना है कि इन शिकायतों की जांच तत्कालीन जांच अधिकारी एस.के. भारद्वाज, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर द्वारा की गई थी।दस्तावेज़ों के मुताबिक जांच का विषय स्काउट-गाइड के फंड के उपयोग, जमीन खरीदी और भुगतान प्रक्रिया से जुड़ा था।

Balod Jamboree

जमीन खरीदी को लेकर सबसे बड़ा विवाद

आरोपों के अनुसार, गजेंद्र यादव के कार्यकाल में ग्राम झांकी, अभनपुर में लगभग 0.180 हेक्टेयर भूमि स्काउट एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के नाम पर खरीदी गई।इस जमीन की खरीद कीमत 58 लाख 23 हजार रुपये बताई जा रही है।

विपक्ष का दावा है कि उस समय की सरकारी गाइडलाइन के अनुसार जमीन की दर 36 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर थी, जिसके हिसाब से 0.180 हेक्टेयर भूमि की अनुमानित कीमत लगभग 6 लाख 48 हजार रुपये होनी चाहिए थी।

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हितों के टकराव का आरोप

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि उक्त जमीन के विक्रेता राजेश अग्रवाल, उस समय स्काउट एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के कोषाध्यक्ष थे।दावा किया गया कि कोषाध्यक्ष और तत्कालीन आयुक्त के बीच सांठगांठ कर संस्था के फंड की कथित बंदरबांट की गई।इन आरोपों को विपक्ष ने “संगठित वित्तीय साजिश” बताते हुए कहा है कि यही कारण है कि वर्तमान जंबूरी आयोजन में भी पारदर्शिता को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो रहे हैं।

राजनीतिक आरोप या दोहराया गया पैटर्न?

विपक्ष का कहना है कि जंबूरी से जुड़ा मौजूदा विवाद किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुराने वित्तीय मामलों की निरंतरता को दर्शाता है।हालांकि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पहले ही इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कह चुके हैं कि “कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है और सभी कार्य नियमों के अनुसार किए गए हैं।”

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