Tuesday, October 6, 2026
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Babri Masjid Controversy : मुर्शिदाबाद के बाद अब इस राज्य में बाबरी मस्जिद स्मारक का एलान! BJP ने कहा “बाबर का नाम अस्वीकार्य”

babri mosque
बाबरी स्मारक निर्माण का नया दावा

नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शनिवार को टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा प्रस्तावित मस्जिद परियोजना की नींव रखे जाने के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग स्थल पर पहुंचे, जिसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया।

मुस्लिम संगठन की घोषणा
तहरीक मुस्लिम शब्बन के अध्यक्ष मुश्ताक मलिक ने कहा कि मस्जिद और उससे जुड़े स्मारक हेतु ग्रेटर हैदराबाद में कल्याणकारी संस्थानों सहित एक परियोजना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि बाबरी ढांचा विध्वंस की वर्षगांठ पर आयोजित एक सार्वजनिक सभा के दौरान यह निर्णय लिया गया।संगठन ने जल्द ही परियोजना के खर्च और समयसीमा पर विस्तृत घोषणा करने की बात कही।

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ऐतिहासिक दावों पर नई बहस
अपने बयान में मलिक ने ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि विवाद से जुड़े कुछ दावों में साहित्यिक और ऐतिहासिक मतभेद मौजूद हैं।मलिक का कहना था कि यह मुद्दा “राजनीतिकरण” का शिकार हुआ है, जिससे सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ा है।

MLA कबीर का दावा—“संविधान अनुमति देता है”

नींव रखने वाले टीएमसी के निलंबित MLA हुमायूं कबीर ने कहा कि:

  • वह कोई गैर-कानूनी कार्य नहीं कर रहे
  • भारत का संविधान किसी भी धर्मस्थल के निर्माण पर रोक नहीं लगाता
  • मस्जिद के साथ अस्पताल, गेस्टहाउस और मीटिंग हॉल शामिल करते हुए 300 करोड़ की परियोजना प्रस्तावित है

कबीर ने कहा कि वे न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं और परियोजना प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढ़ाई जाएगी।

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BJP की तीखी प्रतिक्रिया
BJP के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा” देने वाला कदम बताया।उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश “किसी भी विवादित ऐतिहासिक नाम पर किसी स्मारक को स्वीकार नहीं करेगा”।

सरकार और प्रशासन का रुख
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार:

  • जिला प्रशासन स्थल और परियोजना से जुड़े कागज़ात की समीक्षा कर रहा है
  • राज्य सरकार ने इस पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है
  • सुरक्षा एजेंसियाँ स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं

राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर यह विषय राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता जा रहा है।

 

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