नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Tesla Robotaxi Update: ऑटोमोबाइल सेक्टर में ऑटोनॉमस (बिना ड्राइवर वाली) गाड़ियों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इस आधुनिक तकनीक के सामने अभी भी कई बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला (Tesla) की रोबोटैक्सी को लेकर एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। खुद कंपनी के मालिक एलन मस्क ने खुलासा किया है कि उनकी रोबोटैक्सी अभी भी रात के समय पूरी तरह से कामयाब क्यों नहीं हो पा रही है। मस्क के मुताबिक, रात के वक्त सड़कों पर छोटे जानवरों (जैसे बिल्ली या कुत्ते के बच्चे) को पहचानना कार के कैमरों के लिए एक बेहद कठिन चुनौती साबित हो रहा है, जिससे बेजुबान जानवरों की सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हो जाता है।
वर्तमान में टेस्ला की रोबोटैक्सी पूरी तरह से कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विजन सिस्टम पर आधारित है। दिन के उजाले में यह सिस्टम सड़कों पर इंसानों, अन्य वाहनों और रास्तों को आसानी से डिटेक्ट कर लेता है, लेकिन कम रोशनी या रात के अंधेरे में छोटे जीवों को कैमरे सटीक रूप से भांप नहीं पाते। एलन मस्क ने स्पष्ट किया है कि जब तक एआई सिस्टम इन जानवरों को कम रोशनी में भी सटीक तरीके से पहचानने में पूरी तरह सक्षम नहीं हो जाता, तब तक रात के समय इसका संचालन 100% सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
इस तकनीकी समस्या के कारण हाल ही में टेस्ला ने ऑस्टिन शहर में अपनी रोबोटैक्सी सेवा के ऑपरेटिंग समय को केवल 1 घंटे बढ़ाकर रात 10 बजे से 11 बजे तक किया है। हालांकि, ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल समय बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होता, क्योंकि रात के 10 बजे हो या 11 बजे, सड़क पर अंधेरा एक जैसा ही रहता है। जब तक गाड़ियों में नाइट विजन डिटेक्शन क्षमता को अपग्रेड नहीं किया जाता, तब तक यह जोखिम बना रहेगा।
खास बात यह है कि टेस्ला अन्य कंपनियों की तरह अपनी गाड़ियों में लिडार (LiDAR) या रडार सेंसर्स का इस्तेमाल नहीं करती, बल्कि केवल कैमरों पर निर्भर रहती है। इसके विपरीत, वेमो (Waymo) जैसी अन्य सेल्फ-ड्राइविंग कार कंपनियां लिडार, रडार और कैमरों के मिक्स्ड कॉम्बिनेशन का उपयोग करती हैं, जिससे उनकी गाड़ियां अंधेरे में भी लेजर लाइट की मदद से 3D इमेज बनाकर वस्तुओं को आसानी से पहचान लेती हैं। इस चुनौती से पार पाने के लिए टेस्ला की सॉफ्टवेयर टीम अपने न्यूरल नेटवर्क और एआई मॉडल को लगातार अपडेट कर रही है। कंपनी अपने सॉफ्टवेयर में लाखों नए नाइट-ड्राइविंग डेटा और लो-लाइट इमेजेस को फीड कर रही है, ताकि कम रोशनी में भी छोटे-से-छोटे ऑब्जेक्ट की पहचान सुनिश्चित की जा सके।






