Assistant Teacher Federation CG : मांगें पूरी करो या ‘रायपुर कूच’ के लिए तैयार रहो: सहायक शिक्षक फेडरेशन की सरकार को दो टूक चेतावनी

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Assistant Teacher Federation CG : रायपुर। छत्तीसगढ़ में अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने शनिवार, 17 जनवरी को प्रदेशव्यापी एकदिवसीय हड़ताल की। इस आंदोलन के कारण प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह ठप रही और कक्षाओं में ताले लटके दिखे। फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर के नेतृत्व में प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों में हजारों शिक्षकों ने ‘हल्ला बोल’ करते हुए सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।

रविंद्र राठौर की हुंकार और निर्णायक नेतृत्व: आंदोलन की कमान संभाल रहे रविंद्र राठौर ने जिला मुख्यालयों में सभाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह हड़ताल तो केवल एक ‘ट्रेलर’ या चेतावनी है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर सरकार ने “मोदी की गारंटी” के तहत किए गए वादों को जल्द पूरा नहीं किया, तो आगामी दिनों में प्रदेश के लाखों शिक्षक राजधानी रायपुर का घेराव (कूच) करेंगे। राठौर के कुशल नेतृत्व में प्रदेश के एक दर्जन से अधिक शिक्षक संगठनों ने इस हड़ताल को अपना समर्थन दिया, जिससे आंदोलन ऐतिहासिक बन गया।

प्रमुख चार सूत्रीय मांगें: शिक्षकों ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारियों को सौंपे ज्ञापन में अपनी मुख्य मांगें दोहराई हैं:

  1. वेतन विसंगति: सहायक शिक्षकों की लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति को दूर करना।

  2. क्रमोन्नत वेतनमान: एलबी संवर्ग के शिक्षकों को क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ देना।

  3. पूर्व सेवा गणना: पुरानी सेवा की गणना कर शिक्षा विभाग के समस्त लाभ प्रदान करना।

  4. VSK ऐप का विरोध: स्वयं के मोबाइल से VSK ऐप के माध्यम से हाजिरी (उपस्थिति) दर्ज करने की व्यवस्था को बंद करना और टेट (TET) की अनिवार्यता समाप्त करना।

वादाखिलाफी का आरोप: शिक्षकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले वर्तमान सरकार ने अपने घोषणा पत्र में इन मांगों को पूरा करने का वादा किया था, जिसे अब तक जमीन पर नहीं उतारा गया है। रविंद्र राठौर ने स्पष्ट किया कि शिक्षक कोई नई मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि सरकार को उसके द्वारा दी गई ‘गारंटी’ की याद दिला रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर असर: राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर के सुदूर अंचलों और सरगुजा के पहाड़ों तक इस हड़ताल का व्यापक असर देखा गया। स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण छात्र वापस लौट गए। इस आंदोलन ने सरकार पर भारी दबाव बना दिया है।

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