Sunday, September 27, 2026
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M.P की बेटी ने बढ़ाया प्रदेश का गौरव, इंदौर की आकांक्षा कुटुम्बले ने किया अफ्रीका की सबसे ऊंची ‘माउंट किलिमंजारो’ पर फतह, लहराया तिरंगा

भोपाल/इंदौर : प्रदेश की पर्वतारोही आकांक्षा कुटुम्बले ने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (5895 मीटर) को सफलतापूर्वक फतह कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। किलिमंजारो पर विजय प्राप्त करने के बाद वे भारत की चुनिंदा पर्वतारोहियों की सूची में शामिल हो गई हैं।

कठिन मौसम और ऊंचाई बनी बड़ी चुनौती

करीब 19,341 फीट ऊंची इस चोटी तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। बेस कैंप से शिखर तक की चढ़ाई के दौरान आकांक्षा को सांस लेने में कठिनाई, तेज हवाओं और कम ऑक्सीजन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। अभियान के दौरान तापमान लगभग 12 डिग्री सेल्सियस रहा और करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलती रहीं। बावजूद इसके उन्होंने साहस और धैर्य के साथ चढ़ाई पूरी की।

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एल्ब्रुस के बाद दूसरी बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता

आकांक्षा इससे पहले यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर भी सफल आरोहण कर चुकी हैं। लगातार कठिन पर्वत अभियानों में सफलता उनके मजबूत प्रशिक्षण, अनुशासन और संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने पर्वतारोहण से जुड़े विशेष कोर्स भी किए हैं और कई पहाड़ियों पर अभ्यास कर खुद को तैयार किया।

किलिमंजारो पर दिखी भारतीय संस्कृति की झलक

शिखर पर पहुंचने के बाद आकांक्षा ने कश्मीरी कानी साड़ी पहनकर भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया। जम्मू-कश्मीर से विशेष लगाव रखने वाली आकांक्षा का यह कदम देशभक्ति और सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक माना जा रहा है। पेशे से वे सिविल इंजीनियर हैं, लेकिन जुनून ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही बना दिया।

क्यों खास है माउंट किलिमंजारो

माउंट किलिमंजारो दुनिया की प्रसिद्ध सेवन समिट्स में शामिल है और इसे विश्व का सबसे ऊंचा स्वतंत्र पर्वत माना जाता है। तंजानिया में स्थित यह पर्वत एक निष्क्रिय ज्वालामुखी भी है, जो सवाना घास के मैदानों के बीच खड़ा है। यही विशेषताएं इसे पर्वतारोहियों के लिए आकर्षण और चुनौती दोनों बनाती हैं।

आकांक्षा कुटुम्बले की यह उपलब्धि युवा पीढ़ी, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी है।

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