AI Smart Ward : इस अस्पताल में बन रहा देश का पहला AI स्मार्ट वार्ड, मरीज की हालत बिगड़ते ही अलार्म बजाकर डॉक्टरों को करेगा अलर्ट, जानें कैसे

Parivesh
AI Smart Ward

AI Smart Ward : कानपुर। उत्तर प्रदेश का हेलट अस्पताल जल्द ही एक ऐसी तकनीक से लैस होने जा रहा है, जो मरीजों की जान बचाने के लिए ‘24×7 डिजिटल पहरेदारी’ करेगी। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहली बार एक ऐसा अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वार्ड तैयार किया जा रहा है, जिसमें मरीज की हालत बिगड़ते ही डॉक्टर के फोन पर मैसेज पहुंचेगा और नर्सिंग स्टेशन पर तेज अलार्म बजेगा। इससे इमरजेंसी में इलाज की देरी नहीं होगी और मरीज को तुरंत चिकित्सकीय सहायता मिलेगी।

AI Smart Ward : AI आधारित यह स्मार्ट वार्ड हेलट अस्पताल में वार्ड नंबर-3 में बनाया जा रहा है। यहां हर बेड में सेंसर लगे होंगे जो मरीज के दिल की धड़कन, ऑक्सीजन लेवल, ब्लड प्रेशर और अन्य जरूरी पैरामीटर्स पर नजर रखेंगे। मरीज के शरीर में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव होते ही यह सिस्टम डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को अलर्ट कर देगा।

डॉक्टर नहीं दौड़ेंगे, टेक्नोलॉजी करेगी निगरानी

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, फिलहाल रात के समय मरीजों की हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों और स्टाफ को दौड़भाग करनी पड़ती है, जिससे इलाज में देरी होती है। लेकिन AI वार्ड के चालू होते ही यह सिस्टम डॉक्टरों को रियल टाइम में अपडेट देगा। मरीज की स्थिति वार्ड में लगी मॉनिटरिंग स्क्रीन पर डिस्प्ले होगी, जिससे डॉक्टर और स्टाफ तुरंत इलाज कर सकेंगे।

‘मेक इन इंडिया’ टेक्नोलॉजी से बनेगा AI वार्ड

यह पूरा सिस्टम ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी कंपनी द्वारा तैयार किया गया है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। AI वार्ड में 10 बेड्स को सेंसर-युक्त स्मार्ट मैट्रेस से जोड़ा जाएगा, जो मरीज के शरीर में होने वाले हर बदलाव को पकड़ने में सक्षम होंगे। यह तकनीक मरीज के हर पल के डेटा का विश्लेषण करेगी और स्थिति बिगड़ने पर तुरंत एक्शन लेगी।

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तीमारदारों को नहीं करनी पड़ेगी दौड़भाग

अस्पताल की मीडिया प्रभारी डॉ. सीमा द्विवेदी के मुताबिक, “अब तीमारदारों को डॉक्टर के पास दौड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जैसे ही मरीज की हालत बिगड़ेगी, सिस्टम खुद डॉक्टर को अलर्ट करेगा। मरीज को क्या इलाज दिया गया, उसकी भी पूरी रिपोर्ट रिकॉर्ड में रहेगी।”

पारदर्शी इलाज और तेजी से रिस्पॉन्स

इस हाई-टेक वार्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीज के इलाज में पारदर्शिता आएगी। कौन-सा ट्रीटमेंट कब और क्यों दिया गया, इसकी जानकारी रियल टाइम में उपलब्ध रहेगी। इससे न सिर्फ डॉक्टर अलर्ट मोड पर रहेंगे, बल्कि तीमारदारों को भी बार-बार डॉक्टरों से पूछने की जरूरत नहीं होगी।

जल्द शुरू होगा काम

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि सीएसआर फंड से यह प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। जल्द ही वार्ड नंबर-3 को AI तकनीक से लैस किया जाएगा। भविष्य में इस तरह के वार्ड अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी बनाने की योजना है।

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