Agriculture: पथरीली जमीन और कम पानी में भी उगा सकते हैं लेमनग्रास, एक बार रोपाई के बाद 5 साल तक मिल सकती है पैदावार

News Desk

Agriculture: पथरीली जमीन, सिंचाई के लिए पानी की कमी और आवारा पशुओं से फसलों को होने वाला नुकसान किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे हालात में लेमनग्रास की खेती एक विकल्प बन सकती है। यह सुगंधित घास कम पानी में भी उगाई जा सकती है और इसकी पत्तियों से निकलने वाले तेल की मांग साबुन, कॉस्मेटिक और दूसरे उत्पादों के निर्माण में रहती है।

लेमनग्रास की खेती क्यों है खास?

लेमनग्रास एक सुगंधित पौधा है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से एसेंशियल ऑयल तैयार करने के लिए किया जाता है। इसकी एक खासियत यह भी है कि आवारा पशु इसे कई दूसरी हरी फसलों की तुलना में कम पसंद करते हैं। इस वजह से उन इलाकों के किसान इसे विकल्प के तौर पर देख सकते हैं, जहां पशुओं के कारण फसलों को नुकसान होता है। फिर भी खेत की मिट्टी, जलवायु और पानी की उपलब्धता के हिसाब से पौधों की देखभाल करना जरूरी है।

ऐसे करें खेत में रोपाई

चित्रकूट में लेमनग्रास की खेती कर रहे किसान विजय सिंह के मुताबिक, इसकी खेती शुरू करने से पहले खेत को तैयार किया जाता है। इसके बाद मेड़ या बेड बनाकर पौधों की रोपाई की जाती है। पौधों के बीच लगभग डेढ़ फीट की दूरी रखने की सलाह दी जाती है, ताकि उन्हें फैलने और बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।

अनुकूल मौसम और उचित देखभाल मिलने पर पौधे करीब तीन महीने में घुटने तक ऊंचे हो सकते हैं। हालांकि, उनकी बढ़वार मिट्टी, मौसम और खेती के तरीके पर निर्भर करती है।

एक बार रोपाई, कई साल तक उत्पादन

लेमनग्रास की खासियत है कि कटाई के बाद इसके पौधे दोबारा बढ़ने लगते हैं। किसान विजय सिंह के अनुसार, सही देखभाल के साथ एक बार रोपाई करने के बाद करीब पांच साल तक उत्पादन लिया जा सकता है। पर्याप्त सिंचाई और अनुकूल मौसम में लगभग तीन महीने के अंतराल पर कटाई संभव हो सकती है।

तेल की बिक्री से जुड़ी है कमाई

लेमनग्रास की पत्तियों से निकाला जाने वाला सुगंधित तेल साबुन, कॉस्मेटिक और अन्य उत्पादों में इस्तेमाल होता है। किसान के मुताबिक, एक पौधे की कीमत करीब तीन रुपये बताई गई है। लेकिन खेती शुरू करने से पहले पौधों की संख्या, खेत तैयार करने, खाद, सिंचाई और कटाई की लागत का हिसाब लगाना चाहिए।

तेल की कीमत भी उसकी गुणवत्ता, बाजार की मांग और बिक्री के तरीके के अनुसार बदल सकती है। इसलिए बड़े स्तर पर खेती करने से पहले तेल निकालने की सुविधा, संभावित खरीदारों और स्थानीय बाजार की जानकारी जुटाना जरूरी है। सही योजना के साथ लेमनग्रास उन किसानों के लिए एक वैकल्पिक फसल बन सकती है, जो कम पानी में खेती के नए विकल्प तलाश रहे हैं।

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