भोपाल: मध्य प्रदेश में इंदौर और भोपाल मेट्रो परियोजनाओं को लेकर सियासत गरमा गई है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन के निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया है, वहीं कांग्रेस विधायकों ने मास्टर प्लान में देरी और कथित अनियमितताओं पर सरकार को घेरा है।
‘नेटम टेक्नोलॉजी’ से बनेगी अंडरग्राउंड लाइन
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर और भोपाल में अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन के लिए अब ‘नेटम टेक्नोलॉजी’ का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह तकनीक उन्होंने दिल्ली में देखी थी, जिसमें केवल एक स्थान पर हॉल बनाकर भूमिगत सुरंग तैयार की जाती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फोन लाइन, सीवेज लाइन या अन्य सेवाएं इतनी गहराई पर नहीं होतीं, इसलिए किसी प्रकार की तकनीकी समस्या नहीं आएगी। इंदौर में इस कार्य के लिए मशीन भी पहुंच चुकी है।
कब्रिस्तान को नुकसान नहीं होगा
भोपाल से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील द्वारा कब्रिस्तान को नुकसान पहुंचने की आशंका पर विजयवर्गीय ने कहा कि यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान को कोई हानि नहीं होगी, केवल बाउंड्रीवाल टूटेगी, जिसे कार्य पूर्ण होने के बाद दोबारा बना दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से भ्रम न फैलाने की अपील की।
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मास्टर प्लान पर कांग्रेस का हमला
मास्टर प्लान जारी होने में देरी को लेकर कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भोपाल का मास्टर प्लान करीब 20 साल से लंबित है, जिससे आम नागरिक और व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 22 करोड़ रुपए का टेंडर बढ़कर 72 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत का परिणाम है।
‘इंदौर मॉडल’ पूरे प्रदेश में लागू हो
जयवर्धन सिंह ने स्वच्छता के मुद्दे पर कहा कि इंदौर देश में अव्वल है, इसलिए प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में ‘इंदौर मॉडल’ लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने विकेंद्रीकरण के जरिए घर-घर कचरा संग्रहण और निष्पादन की व्यवस्था लागू करने की मांग की।
साथ ही उन्होंने कहा कि भोपाल और इंदौर में मेट्रो तभी सफल होगी, जब उसे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से प्रभावी रूप से जोड़ा जाएगा।
सीएम और मंत्री के बीच मतभेद के आरोप
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन विभाग के बीच टकराव के कारण मास्टर प्लान डेढ़ साल से रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि इस देरी से अवैध कॉलोनियों का निर्माण बढ़ रहा है और सरकार की संवेदनहीनता साफ दिखाई दे रही है।
भोपाल में मेट्रो और मास्टर प्लान को लेकर जारी यह सियासी घमासान आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।











