Thursday, August 27, 2026
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आठ साल बाद इजराइल दौरे पर PM मोदी, बराक मिसाइल से लेकर AI वॉरफेयर तक, क्या होंगे नए सौदे?

निशानेबाज़ न्यूज़ डेस्क :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आठ साल बाद दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर इजराइल जा रहे हैं। यह दौरा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आमंत्रण पर हो रहा है। मौजूदा वैश्विक हालात—पश्चिम एशिया में अस्थिरता, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा और बदलते सुरक्षा समीकरण—इस यात्रा को रणनीतिक रूप से बेहद अहम बना रहे हैं।

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस बार India Israel Defense Deals को नई दिशा मिल सकती है, खासकर हाईटेक सैन्य तकनीक और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्र में।

मिसाइल और एयर डिफेंस में मजबूत साझेदारी

भारत और इजराइल के बीच सबसे अहम सहयोग मिसाइल और वायु रक्षा प्रणाली को लेकर है।

  • बराक-1: कम दूरी की नौसैनिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल।

  • बराक-8 (LR-SAM/MR-SAM): मध्यम से लंबी दूरी की मिसाइल, जिसे दोनों देशों ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।

यह प्रणाली 70 से 100 किलोमीटर तक दुश्मन के लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, एंटी-शिप मिसाइल और ड्रोन को निशाना बना सकती है। भारतीय नौसेना, वायुसेना और थलसेना तीनों इसे उपयोग में ला रहे हैं।मेक इन इंडिया के तहत इसके कई कंपोनेंट्स का उत्पादन भारत में हो रहा है।

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एंटी-टैंक और काउंटर-ड्रोन क्षमता

इजराइल की उन्नत एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) भारतीय सेना की ताकत का अहम हिस्सा है। यह कंधे, वाहन या हेलिकॉप्टर से दागी जा सकती है और आधुनिक टैंकों के रिएक्टिव आर्मर को भेदने में सक्षम है।

इसके अलावा काउंटर-ड्रोन सिस्टम और लोइटरिंग म्यूनिशन (Loitering Munition) पर भी चर्चा की संभावना है, जो आधुनिक युद्ध में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

ड्रोन और सर्विलांस टेक्नोलॉजी

भारत पहले से ही हेरोन और सर्चर UAV जैसे इजरायली ड्रोन का उपयोग कर रहा है।

  • हेरोन: मध्यम ऊंचाई, लंबी अवधि तक निगरानी

  • सर्चर: हल्का सर्विलांस ड्रोन

ये ड्रोन सीमावर्ती इलाकों में रियल-टाइम इंटेलिजेंस जुटाने में महत्वपूर्ण हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा में और उन्नत ड्रोन सिस्टम पर सहमति बन सकती है।

रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और साइबर डिफेंस

इजराइल से लिए गए एडवांस्ड रडार सिस्टम भारतीय वायु रक्षा नेटवर्क का हिस्सा हैं। ये कम ऊंचाई पर उड़ते ड्रोन और क्रूज मिसाइल का पता लगाने में सक्षम हैं।

भारतीय लड़ाकू विमानों में इजरायली इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और मिसाइल वार्निंग सिस्टम लगे हैं, जो दुश्मन के रडार को जाम कर सकते हैं।

इस बार की यात्रा में AI-ड्रिवन कॉम्बैट सिस्टम और साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क पर भी फोकस रहने की संभावना है।

मेक इन इंडिया और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए देश में उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

बराक-8 जैसी परियोजनाएं इसका उदाहरण हैं, जहां DRDO और इजरायली कंपनियां मिलकर निर्माण कर रही हैं। भविष्य में डिफेंस कॉरिडोर के जरिए इस मॉडल को और विस्तार दिया जा सकता है।

क्षेत्रीय राजनीति और रणनीतिक संदेश

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब लाल सागर और पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है। भारत एक संतुलित नीति के तहत इजराइल और अरब देशों दोनों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है।

इजराइल की खासियत यह है कि वह कम राजनीतिक शर्तों के साथ उन्नत और कॉम्बैट-टेस्टेड तकनीक उपलब्ध कराता है, जो भारत की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप है।

आठ साल बाद हो रही यह यात्रा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने का प्रयास है। India Israel Defense Deals आने वाले समय में मिसाइल डिफेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और AI आधारित युद्ध प्रणाली के क्षेत्र में और गहरे हो सकते हैं। यह दौरा भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति और वैश्विक रणनीतिक संतुलन का स्पष्ट संकेत भी है।

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