Thursday, August 20, 2026
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C.G हाई कोर्ट ने दहेज मृत्यु मामले में पति को नहीं दी राहत, दोषसिद्धि बरकरार

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निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना और दहेज मृत्यु से जुड़े एक पुराने मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सजा की अवधि में आंशिक राहत प्रदान की। अदालत ने पति योगेश कोसले की सजा 10 वर्ष से घटाकर न्यूनतम 7 वर्ष कर दी, जबकि 87 वर्षीय ससुर आधार दास कोसले को जेल भेजने से इंकार कर दिया।

2002 की दर्दनाक घटना

मामला बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां वर्ष 2002 में विवाह के कुछ वर्षों बाद महिला और उसकी एक वर्षीय बच्ची की रेलवे ट्रैक पर ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी।अभियोजन के अनुसार, महिला को उसके पति और ससुराल पक्ष द्वारा लगातार दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाता था। मृतका के परिजनों और पड़ोसियों ने भी गवाही दी कि विवाह के बाद से ही मारपीट, ताने और आर्थिक मांगें जारी थीं। बेटी के जन्म के बाद प्रताड़ना और बढ़ गई थी तथा एक लाख रुपये की मांग व्यापार शुरू करने के नाम पर की गई थी।

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ट्रायल कोर्ट का फैसला

आठवें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफटीसी), बिलासपुर ने 28 फरवरी 2005 को आरोपी पति को धारा 304-बी (दहेज मृत्यु) के तहत 10 वर्ष सश्रम कारावास तथा धारा 306 (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) में दोषी ठहराया था।

सजा में राहत लेकिन दोष कायम

हाई कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों को विश्वसनीय मानते हुए दोषसिद्धि को सही ठहराया। हालांकि, आरोपी की परिस्थितियों को देखते हुए सजा की अवधि कम कर न्यूनतम सात वर्ष कर दी गई। वहीं वृद्ध ससुर की उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें कारावास से राहत प्रदान की गई।यह फैसला दहेज प्रथा के खिलाफ कानूनी सख्ती और साथ ही न्यायालय के मानवीय दृष्टिकोण—दोनों को दर्शाता है।

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