Friday, August 14, 2026
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बस्तर पंडुम समापन में बोले गृह मंत्री शाह- बस्तर के विकास का नया रोडमैप तैयार, खत्म हो रहा नक्सलवाद

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निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम के भव्य समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले पांच वर्षों में बस्तर को विकसित क्षेत्र के रूप में स्थापित किया जाएगा। गांव-गांव तक सड़क, बिजली, स्कूल और नेटवर्क सुविधा पहुंचाने के साथ ही बैंकिंग सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति को प्रति माह पांच किलो राशन और किसानों का पूरा धान खरीदे जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई।

नक्सलवाद पर सख्त संदेश और सरेंडर की अपील

गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर की पहचान हिंसा या बारूद से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विरासत से है। उन्होंने माओवादी संगठनों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि सरेंडर करने वालों की सुरक्षा और पुनर्वास की पूरी व्यवस्था सरकार करेगी। पूना मारगेम योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक करीब 2500 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। लक्ष्य रखा गया है कि 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त किया जाए

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विकास, सिंचाई, उद्योग और पर्यटन पर बड़ा फोकस

आने वाले समय की योजनाओं में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे, ग्लास ब्रिज और अन्य आकर्षण विकसित करने की घोषणा की गई। इसके अलावा 128 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र बसाने, दंतेवाड़ा-सुकमा-बीजापुर में लगभग 2.75 लाख एकड़ सिंचाई परियोजना, रावघाट परियोजना और नदी जोड़ो अभियान को गति देने की बात कही गई। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 90 हजार से अधिक युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने की योजना भी सामने रखी गई।

मुख्यमंत्री साय ने गिनाईं सुरक्षा बलों की सफलताएं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि चार दशकों से विकास में बाधक रहा नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है। पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है, जिससे आम लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि हाल के गणतंत्र दिवस पर 40 से अधिक गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया, जो बदलते बस्तर की तस्वीर दर्शाता है।

जनजातीय संस्कृति के संग भव्य समापन समारोह

द्वितीय बस्तर पंडुम का समापन समारोह सांस्कृतिक वैभव और जनजातीय गौरव का प्रतीक बनकर उभरा। इस वर्ष 12 विधाओं की प्रतियोगिताओं में बस्तर संभाग के सात जिलों, 1885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपदों से हजारों कलाकारों ने भाग लिया। जिला और जनपद स्तर की चयन प्रक्रिया के बाद 55 हजार से अधिक कलाकार अंतिम चरण तक पहुंचे, जिससे बस्तर की समृद्ध कला-परंपरा को राष्ट्रीय मंच मिला।

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