निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : भारत और अमेरिका के बीच 7 फरवरी को घोषित अंतरिम व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत के लिए रणनीतिक बढ़त बताते हुए कहा कि जहां अमेरिका ने चीन पर 35% और बांग्लादेश पर करीब 20% से अधिक टैरिफ लगाया है, वहीं भारत पर केवल 18% टैरिफ लागू होगा।यह अंतर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय उत्पादों को बढ़त दे सकता है।
किन क्षेत्रों को मिलेगा सीधा फायदा
समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण भारतीय निर्यात—
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जेनेरिक दवाएं
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रत्न-जवाहरात और हीरे
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विमान के पुर्जे
—अमेरिकी बाजार में टैरिफ-फ्री पहुंच हासिल करेंगे।
इसके अलावा कॉफी, आम, चाय, मसाले, नारियल तेल, सुपारी, कोको उत्पाद, तिल, खसखस और विभिन्न फल-सब्जियों जैसे कृषि उत्पादों को भी शुल्क-मुक्त निर्यात का लाभ मिलने की बात कही गई है। यह कदम कृषि और लघु उद्योग क्षेत्र के लिए राजस्व और रोजगार दोनों बढ़ा सकता है।
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30 ट्रिलियन डॉलर बाजार तक पहुंच
पीयूष गोयल के अनुसार, यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर की विशाल अमेरिकी अर्थव्यवस्था के द्वार खोलता है।फरवरी 2025 में शुरू हुई व्यापार वार्ता का लक्ष्य 500 अरब डॉलर वार्षिक व्यापार तक पहुंचना है, जो दीर्घकाल में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा।
विकसित भारत 2047 के संदर्भ में महत्व
केंद्रीय मंत्री ने इसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में अहम पड़ाव बताया।
उनके मुताबिक यह डील—
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‘मेक इन इंडिया’ को गति देगी
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MSME, किसान और मछुआरों को वैश्विक बाजार दिलाएगी
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रोजगार सृजन में योगदान देगी
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति
चीन, बांग्लादेश और वियतनाम पर अपेक्षाकृत अधिक टैरिफ लागू होने से भारत को ट्रेड डायवर्जन का लाभ मिल सकता है।
हालांकि, दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि—
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भारतीय उद्योग लागत प्रतिस्पर्धा बनाए रखें
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सप्लाई चेन मजबूत हो
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गुणवत्ता मानकों का पालन हो
यानी यह समझौता अवसर तो देता है, लेकिन नीतिगत और औद्योगिक तैयारी भी उतनी ही जरूरी होगी।













