नई दिल्ली : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए पात्रता और प्रयासों से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नई अधिसूचना के अनुसार पहले से चयनित अधिकारियों द्वारा दोबारा परीक्षा देने की प्रक्रिया को सीमित किया गया है, ताकि चयन प्रणाली में संतुलन और पारदर्शिता बनी रहे।
IPS अधिकारियों के विकल्प पर रोक
नए नियमों के तहत यदि कोई अभ्यर्थी पहले से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में कार्यरत है, तो वह दोबारा परीक्षा देकर IPS सेवा को विकल्प के रूप में नहीं चुन सकेगा। हालांकि, 2025 या उससे पहले किसी सेवा में चयनित कुछ अभ्यर्थियों को सीमित अवसर प्रदान किए गए हैं, जिनके तहत वे बिना इस्तीफा दिए दो बार परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
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IAS और IFS अधिकारियों के लिए प्रतिबंध
आयोग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी सिविल सेवा परीक्षा 2026 में शामिल नहीं हो पाएंगे। वहीं जिन अभ्यर्थियों का अंतिम परिणाम लंबित है, उन्हें सशर्त अनुमति दी गई है—परिणाम घोषित होने के बाद चयनित उम्मीदवार मुख्य परीक्षा में आगे नहीं बढ़ सकेंगे।
विभागीय अनुमति बनी अनिवार्य शर्त
ग्रुप-A सेवा में चयनित होकर पुनः परीक्षा देना चाहने वाले अभ्यर्थियों के लिए संबंधित विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है। यदि विभाग प्रशिक्षण या सेवा कारणों से अनुमति नहीं देता, तो उम्मीदवार का आवेदन स्वतः निरस्त माना जाएगा।
बार-बार प्रयासों पर आयोग सख्त
UPSC ने सेवा में रहते हुए बार-बार परीक्षा देने की प्रवृत्ति पर भी सख्त रुख अपनाया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने और नए अभ्यर्थियों को अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।













