Monday, September 28, 2026
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Piyush Goyal US Trade Deal Statement : “चित्त भी मेरी, पट भी मेरी नहीं चलेगी”: राज्यसभा में ट्रेड डील पर जेपी नड्डा ने विपक्ष को घेरा

Piyush Goyal US Trade Deal Statement : नई दिल्ली (4 फरवरी 2026)। बजट सत्र के दौरान बुधवार को राज्यसभा में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भारी हंगामा हुआ। विपक्ष ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के खिलाफ ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ पेश किया और आरोप लगाया कि जब संसद का सत्र चल रहा है, तो मंत्री ने सदन को जानकारी देने से पहले बाहर (प्रेस या सोशल मीडिया) बयान क्यों दिया?

विपक्ष की मुख्य आपत्ति

तिरुचि शिवा और अन्य विपक्षी नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार, किसी भी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौते की जानकारी सबसे पहले संसद को मिलनी चाहिए। विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने संसद की गरिमा को दरकिनार कर बाहर बयानबाजी की।

नेता सदन जेपी नड्डा का जवाब और सफाई:

विपक्ष के हंगामे को शांत करते हुए जेपी नड्डा ने सरकार का बचाव किया और कुछ महत्वपूर्ण तर्क रखे:

  • राजनीतिक प्रतिक्रिया बनाम आधिकारिक बयान: नड्डा ने स्पष्ट किया कि पीयूष गोयल ने कल (मंगलवार) जो कहा था, वह विपक्ष के आरोपों पर एक ‘पॉलिटिकल रिस्पॉन्स’ (राजनीतिक जवाब) था, न कि कोई आधिकारिक नीतिगत घोषणा। वास्तविक ‘पॉलिटिकल स्टेटमेंट’ उन्होंने आज सदन में रखा है।

  • पीयूष गोयल का स्वास्थ्य और प्रयास: नड्डा ने बताया कि कल पीयूष गोयल मुंबई में थे और अस्वस्थ (बीमार) थे। इसके बावजूद वे दिल्ली आए और सदन में बयान देने की कोशिश की, लेकिन कल लोकसभा की कार्यवाही बाधित होने के कारण वे बयान नहीं दे सके।

  • लोकसभा का पहला अधिकार: नड्डा ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि अगर गोयल कल सीधे राज्यसभा में बयान दे देते, तो विपक्ष यह सवाल उठाता कि लोकसभा (निचले सदन) को पहले प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष “चित्त भी मेरी और पट भी मेरी” वाली राजनीति कर रहा है।

  • कांग्रेस पर कटाक्ष: उन्होंने कांग्रेस पर ‘इररिस्पॉन्सिबल बिहेवियर’ का आरोप लगाते हुए कहा कि वे बात-बात पर सदन छोड़कर चले जाते हैं। आज गोयल ने पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में विधिवत बयान दिया है।

पीयूष गोयल ने सदन को क्या दिया आश्वासन?

हंगामे के बीच पीयूष गोयल ने सदन को आश्वस्त किया कि इस ट्रेड डील में भारत के कृषि और डेयरी सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने इसे ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया और कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है।

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