Wednesday, September 30, 2026
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Social Organizations Rewa : रीवा में ‘भारत बंद’ का व्यापक असर: यूजीसी के विरोध में सड़कों पर उतरा सवर्ण समाज

Social Organizations Rewa : रीवा। केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी (UGC) के नियमों में प्रस्तावित बदलावों के खिलाफ देशव्यापी विरोध की आग अब विंध्य क्षेत्र तक पहुँच गई है। रविवार को सवर्ण समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा बुलाए गए ‘भारत बंद’ का रीवा में व्यापक असर देखने को मिला। संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सुबह से ही शहर के मुख्य बाजारों और चौराहों पर मोर्चा संभाल लिया और व्यापारियों से समर्थन मांगते हुए दुकानें बंद कराईं। इस दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था।

भले ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़े कुछ प्रावधानों पर फिलहाल रोक लगा दी है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत होता नजर नहीं आ रहा है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठनों का कहना है कि सरकार ऐसे कानून लाकर समाज को जातियों में बांटने और आपस में लड़ाने का प्रयास कर रही है। संगठनों की प्रमुख मांग है कि प्रस्तावित प्रावधानों को पूरी तरह से रद्द किया जाए और शिक्षा व प्रशासनिक व्यवस्था में सभी को एक समान नजरिए से देखा जाए, ताकि किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो।

शहर के मुख्य व्यापारिक क्षेत्रों जैसे जय स्तंभ, सिरमौर चौराहा और समान तिराहे पर आंदोलनकारियों ने रैलियां निकालीं और नारेबाजी की। करणी सेना के संभागीय प्रवक्ता यज्ञ प्रताप सिंह ने इस दौरान कहा कि वे किसी भी ऐसे कानून को स्वीकार नहीं करेंगे जो समाज की समरसता को प्रभावित करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इन प्रावधानों को पूरी तरह वापस नहीं लेती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।

प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद मोर्चे पर रहकर स्थिति की निगरानी की। हालांकि, संगठनों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया और व्यापारियों ने भी स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखकर बंद को सफल बनाने में सहयोग दिया। दोपहर बाद तक बाजार में सन्नाटा पसरा रहा, जिससे आम जनजीवन पर भी इसका असर दिखाई दिया।

फिलहाल, संगठनों ने जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार के नाम एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें अपनी आपत्तियों और मांगों को प्रमुखता से दर्ज किया गया है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस भारी विरोध और सामाजिक असंतोष के बीच क्या रुख अपनाती है।

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