Chhal Road Traffic : घरघोड़ा। क्षेत्र के छाल रोड पर इन दिनों यातायात नियमों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा का मखौल उड़ाया जा रहा है। प्रशासन द्वारा तय किए गए ‘नो-एंट्री’ नियमों को ठेंगा दिखाते हुए भारी वाहन (ट्रक और डंपर) स्कूली समय के दौरान भी धड़ल्ले से सड़क पर दौड़ रहे हैं। इस लापरवाही ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कागजों तक सिमटा प्रशासन का आदेश नियमों के मुताबिक, स्कूल खुलने और छुट्टी होने के दौरान व्यस्त सड़कों पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित होता है, ताकि छोटे बच्चे और साइकिल सवार छात्र सुरक्षित घर पहुँच सकें। लेकिन छाल रोड पर नजारा इसके ठीक उलट है। सुबह और दोपहर के समय, जब सड़क पर बच्चों की भीड़ सबसे ज्यादा होती है, उसी वक्त कोयले और अन्य सामग्री से लदे भारी वाहन धूल उड़ाते हुए निकलते हैं।
हादसों का साया, बच्चों में दहशत स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि भारी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही के कारण छोटे बच्चों को सड़क किनारे दुबक कर खड़े होना पड़ता है। कई बार तेज रफ्तार डंपरों के कारण साइकिल सवार बच्चे अनियंत्रित होकर गिरते-गिरते बचे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नो-एंट्री का बोर्ड तो लगा है, लेकिन उसे लागू कराने के लिए मौके पर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं रहता।
अभिभावकों ने दी आंदोलन की चेतावनी क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से मांग की है कि छाल रोड पर स्कूल टाइम के दौरान नो-एंट्री का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही नियमित चेकिंग शुरू नहीं हुई और नियम तोड़ने वाले चालकों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
फिलहाल स्थिति यह है कि भारी वाहनों के शोर और धूल के बीच मासूमों का बचपन सड़क पर असुरक्षित है, और जिम्मेदार तंत्र किसी बड़ी अनहोनी के इंतजार में सो रहा है।













