Friday, August 21, 2026
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Indore Water Crisis : गंदा पानी बना काल! इंदौर के भागीरथपुरा में 28 दिन में गईं 28 जानें

इंदौर। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि जानलेवा त्रासदी बन चुका है। रविवार 25 जनवरी को एक और बुजुर्ग की मौत के बाद इस क्षेत्र में मरने वालों की संख्या 28 दिन में 28 तक पहुंच गई है। 29 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा, जिससे पूरे इलाके में दहशत और गुस्से का माहौल है।

गंदे पानी से फैली बीमारी, हर घर में डर

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से नल में दूषित और बदबूदार पानी आ रहा है। इसी पानी के इस्तेमाल से उल्टी-दस्त, पेट दर्द, बुखार और संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर पड़ रहा है।

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अस्पतालों में बढ़ा दबाव

भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों से रोजाना बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। निजी और सरकारी अस्पतालों में बेड कम पड़ने लगे हैं। कई मरीजों की हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। रविवार को जिस बुजुर्ग की मौत हुई, वह भी कई दिनों से संक्रमित पानी से फैली बीमारी से जूझ रहे थे।

प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि शिकायतें करने के बावजूद न तो पाइपलाइन बदली गई और न ही शुद्ध पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। कई इलाकों में सीवर लाइन और पेयजल लाइन के मिल जाने की आशंका जताई जा रही है।

जांच और कार्रवाई की मांग

रहवासियों की मांग है कि दूषित पानी की तत्काल लैब जांच, संक्रमित पाइपलाइनों को बदलना और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए। साथ ही, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम उठाए जाते, तो 28 जानें बचाई जा सकती थीं।

सवालों के घेरे में सिस्टम

28 मौतों के बाद भी हालात पर काबू न पाया जाना प्रशासनिक तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। यह मामला अब केवल एक इलाके का नहीं, बल्कि पूरे शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है।

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