Tuesday, August 18, 2026
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बांग्लादेश में दिल दहला देने वाली घटना, दुकान में हिंदू युवक को जिंदा जलाया, डर का माहौल

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : बांग्लादेश में चुनावी माहौल के बीच अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और कट्टरपंथी बयानबाज़ी लगातार गंभीर रूप लेती जा रही है। एक ओर जमात-ए-इस्लामी के नेताओं के भड़काऊ बयान सामने आ रहे हैं, तो दूसरी ओर हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर की जा रही हिंसक घटनाएं देश की आंतरिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े कर रही हैं। ताजा मामला नरसिंदी जिले से सामने आया है, जहां 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल भौमिक को उसकी ही दुकान में जिंदा जलाकर मार दिया गया।

दुकान में सोते समय जिंदा जलाया गया युवक

घटना शुक्रवार देर रात की बताई जा रही है। चंचल भौमिक अपनी छोटी सी दुकान में रोज़ की तरह सो रहा था। आरोप है कि एक हमलावर ने पहले दुकान का शटर बाहर से बंद किया, फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावर आग लगने के बाद कुछ देर तक बाहर खड़ा रहा और चंचल के जलकर मरने के बाद मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक युवक की मौत हो चुकी थी।

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परिवार का इकलौता सहारा था चंचल

चंचल भौमिक अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका था। वह अपनी बीमार मां, दिव्यांग बड़े भाई और छोटे भाई की जिम्मेदारी अकेले उठा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि चंचल बेहद शांत स्वभाव का था और उसकी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी। परिजनों ने आरोप लगाया है कि यह हत्या पूरी तरह सुनियोजित है और इसके पीछे धार्मिक नफरत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में हिंदुओं को इस तरह निशाना बनाया गया हो। इससे पहले दीपु चंद्र दास और खोकोन चंद्र दास को भी कथित तौर पर जिंदा जलाकर मार दिया गया था। बीते कुछ महीनों में हिंदू मंदिरों, दुकानों और घरों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में डर का माहौल है।

जमात नेता का भड़काऊ बयान, संसद से हिंदुओं को बाहर करने की धमकी

इसी बीच जमात-ए-इस्लामी के बर्गुना-2 सीट से उम्मीदवार अफजल हुसैन का एक बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। एक चुनावी सभा में हुसैन ने कहा कि जिस देश की 80 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, वहां संसद में गैर-मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने भीड़ से सवाल किया, “आप कुरान चाहते हैं या भटकाव?” और दावा किया कि उनकी पार्टी बांग्लादेश में कुरान आधारित शासन लागू करेगी। इतना ही नहीं, उन्होंने संविधान को खारिज करते हुए शरीयत आधारित सजा प्रणाली का समर्थन भी किया।

चुनावी राजनीति में कट्टरपंथ की एंट्री पर चिंता

सरकारी सूत्रों और विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान और घटनाएं चुनावी राजनीति में कट्टरपंथ घुसाने की कोशिश हैं, जिससे समाज का ध्रुवीकरण बढ़ सकता है और देश की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश पर सवाल उठने लगे हैं।

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