Sunday, September 27, 2026
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अरावली पहाड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! अवैध खनन पर ‘जीरो टॉलरेंस’, 100 मीटर नियम पर रोक बरकरार

नई दिल्ली : अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर लंबे समय से जारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त और दूरगामी टिप्पणी की है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल तकनीकी परिभाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के पर्यावरणीय भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ है। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध खनन बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि इसके दुष्परिणाम “अपूर्णीय और दूरगामी” होते हैं, जिन्हें बाद में सुधारा नहीं जा सकता।

हाई-पावर्ड कमेटी का गठन तय

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि अरावली पहाड़ियों की वैज्ञानिक और स्पष्ट परिभाषा तय करने के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया जाएगा। इस समिति में पर्यावरण, वानिकी, भू-विज्ञान और अन्य संबंधित क्षेत्रों के स्वतंत्र और निष्पक्ष विशेषज्ञ शामिल होंगे।अदालत ने सभी पक्षों—राज्य सरकारों, केंद्र सरकार और एमिकस क्यूरी—को निर्देश दिया है कि वे चार सप्ताह के भीतर संभावित विशेषज्ञों के नाम और सुझाव प्रस्तुत करें।

100 मीटर नियम पर रोक बरकरार

कोर्ट ने अपने पुराने अंतरिम आदेश को जारी रखते हुए उस सिफारिश पर रोक बरकरार रखी है, जिसमें 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली मानने की बात कही गई थी। यह सिफारिश पर्यावरण मंत्रालय की एक समिति ने दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे संवेदनशील और पुनर्विचार योग्य बताते हुए स्थगित कर चुका है।
न्यायालय का मानना है कि इस तरह का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया जा सकता और नई विशेषज्ञ समिति तथ्यात्मक व वैज्ञानिक आधार पर अपनी सिफारिश देगी।

अवैध खनन पर राजस्थान सरकार को चेतावनी

सुनवाई के दौरान राजस्थान के कई इलाकों में जारी अवैध खनन का मुद्दा भी उठा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के वकील को तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अरावली जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही भविष्य की पीढ़ियों के पर्यावरणीय अधिकारों का उल्लंघन है।

अंतरिम आदेश रहेगा लागू

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले साल दिसंबर में पारित अंतरिम आदेश अगले आदेश तक लागू रहेगा। साथ ही, हस्तक्षेपकर्ताओं को एमिकस क्यूरी से संपर्क कर अपनी रिपोर्ट और सुझाव सौंपने को कहा गया है। एमिकस क्यूरी को निर्देश दिया गया है कि वे सभी सुझावों को अपनी विस्तृत रिपोर्ट में शामिल करें।
अब इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी, जिसमें समिति गठन और आगे की प्रक्रिया पर अहम फैसला लिया जा सकता है।

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