Mahakal Bhasma Aarti : महाकाल की भस्म आरती में डूबा उज्जैन, तड़के गूंजे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे

उज्जैन: विश्वविख्यात श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आज तड़के संपन्न हुई भस्म आरती ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि बाबा महाकाल केवल आराध्य नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और चेतना का केंद्र हैं। सुबह ठीक 4 बजे जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा और वातावरण पूर्णतः शिवमय हो गया।

वैदिक मंत्रों के बीच पंचामृत अभिषेक
भस्म आरती का आरंभ शुद्ध वैदिक विधि-विधान से हुआ। मंदिर के आचार्यों के सान्निध्य में पुजारियों ने भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक किया। इसके पश्चात पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक के दौरान रुद्राष्टक, शिव तांडव स्तोत्र और रुद्र पाठ की गूंज ने श्रद्धालुओं को गहन आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

दिव्य भस्म श्रृंगार ने मोहा मन
अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का दिव्य भस्म से श्रृंगार किया गया। जैसे ही भस्म अर्पित की गई, गर्भगृह में उपस्थित श्रद्धालु नतमस्तक हो गए। कई भक्तों की आंखों में आंसू और मुख पर शांति का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

भक्तों को हुई सजीव अनुभूति
आरती में शामिल श्रद्धालुओं का कहना था कि प्रत्येक क्षण में ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं बाबा महाकाल भक्तों के बीच विराजमान होकर अपनी कृपा बरसा रहे हों। कई लोग ध्यान, जप और मौन साधना में लीन नजर आए।

देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
आज की भस्म आरती में सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक भीड़ देखी गई। मध्यप्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, कर्नाटक और तमिलनाडु से हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। कुछ भक्तों ने प्रथम पंक्ति में दर्शन के लिए पूरी रात कतार में खड़े रहकर प्रतीक्षा की।

सुरक्षा व्यवस्था रही सुदृढ़
श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने अतिरिक्त बैरिकेडिंग, अलग प्रवेश-निकास मार्ग और अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था की। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों से सतत निगरानी की गई, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारू बनी रही।

लाइव स्ट्रीमिंग से वैश्विक जुड़ाव
जो श्रद्धालु उज्जैन नहीं पहुंच सके, उन्होंने मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के माध्यम से भस्म आरती के लाइव दर्शन किए। विदेशों में रह रहे हजारों भारतीयों ने भी डिजिटल माध्यम से इस अलौकिक आराधना का लाभ लिया।

परंपरा और तकनीक का अद्भुत संगम
आज महाकाल की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैश्विक आध्यात्मिक पहचान बन चुकी है। सदियों पुरानी परंपरा और आधुनिक तकनीक के संगम ने बाबा महाकाल की महिमा को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा दिया है।

 

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