HomeMadhya PradeshNTPC land : कागज़ों में सिमटा पुनर्वास : एनटीपीसी ने ली जमीन,...

NTPC land : कागज़ों में सिमटा पुनर्वास : एनटीपीसी ने ली जमीन, भुला दिए वादे, न्याय की आस में घंटों फर्श पर बैठी रही दिव्यांग बच्चों की मां

Date:

Related stories

NTPC land : सिंगरौली। एक ओर मध्य प्रदेश सरकार महिला सम्मान और त्वरित न्याय की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी ओर सिंगरौली कलेक्ट्रेट कार्यालय से सामने आई एक तस्वीर ने प्रशासनिक संवेदनहीनता की पोल खोल दी है। एनटीपीसी परियोजना से प्रभावित एक महिला अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची, लेकिन घंटों तक कलेक्टर कक्ष के बाहर फर्श पर बैठकर इंतजार करने के बावजूद उसकी बात सुनने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं आया। इस लापरवाही ने विकास और पुनर्वास के सरकारी दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

NTPC land : पीड़ित महिला ने बताया कि एनटीपीसी ने उसकी जमीन अधिग्रहित की थी, जिसके बदले में कंपनी ने उसे नौकरी और पुनर्वास सहायता देने का वादा किया था। हालांकि, जमीन लिए जाने के बाद ये वादे केवल कागज़ों में ही सिमट कर रह गए। महिला का आरोप है कि उसे आज तक न नौकरी मिली है और न ही पुनर्वास की कोई सहायता प्रदान की गई है। महिला की यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब उसने बताया कि उसके दोनों बच्चे विकलांग (दिव्यांग) हैं—वे न सुन पाते हैं और न बोल पाते हैं।

NTPC land : महिला ने अधिकारियों को बताया कि कंपनी ने उसके दिव्यांग बच्चों के भविष्य को देखते हुए विशेष पुनर्वास सहायता देने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद, अब कंपनी के अधिकारी उससे मिलने से भी कतराते हैं, और प्रशासन उसकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। महिला का आरोप है कि वह महीनों से विभिन्न दफ्तरों के चक्कर काट रही है, कंपनी समस्या सुनने को तैयार नहीं है, और प्रशासन जनसुनवाई में सिर्फ आवेदन लेता है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता, जिससे उसकी उम्मीदें टूट चुकी हैं।

NTPC land : महिला कलेक्टर के इंतजार में घंटों तक जमीन पर बैठी रही, इस उम्मीद में कि अधिकारी उसकी दशा सुनेंगे। हालांकि, न कोई जिम्मेदार बाहर आया और न ही उसकी समस्या पर तुरंत ध्यान दिया गया। जब कलेक्टर ने कार्यभार संभाला था, तो आमजन में त्वरित सुनवाई की उम्मीदें जगी थीं, लेकिन समय बीतते ही हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौटते नजर आ रहे हैं। कई आवेदनों और जनसुनवाई में गुहार लगाने के बाद भी कार्रवाई न होने से लोगों का प्रशासन पर से भरोसा उठने लगा है।

NTPC land : यह तस्वीर प्रशासनिक संवेदनहीनता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। जब एक महिला, जो अपने दिव्यांग बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रही है और अपनी जमीन भी विकास के लिए दे चुकी है, कलेक्टर कार्यालय में ही न्याय की प्रतीक्षा में घंटों फर्श पर बैठी रहती है, तो यह विकास और पुनर्वास के सभी दावों को झूठा साबित करती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पत्रकारों ने भी कलेक्टर से प्रतिक्रिया लेने के लिए घंटों इंतजार किया, लेकिन कलेक्टर ने पत्रकारों से मिलना भी उचित नहीं समझा, जिससे प्रशासनिक उदासीनता और बढ़ गई है।

Share The News
VIKASH KHALKHO
VIKASH KHALKHO
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

Subscribe

- Never miss a story with notifications

- Gain full access to our premium content

- Browse free from up to 5 devices at once

Latest stories

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here