Monday, August 17, 2026
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Raipur Mekahara : छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े अस्पताल में “कॉल मी सर्विस” पर गंभीर आरोप….पढ़े पूरी खबर

रायपुर। Raipur Mekahara : मेकाहारा अस्पताल, जो छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा संस्थान है, वहां सफाई व्यवस्था संभाल रही निजी कंपनी “कॉल मी सर्विस” एक बार फिर विवादों के दलदल में घिर गई है। लेकिन इस बार मामला महज़ सफाई में लापरवाही का नहीं, बल्कि शोषण, भ्रष्टाचार और आपराधिक गतिविधियों तक जा पहुंचा है।

संघ ने लगाया आरोप: अस्पताल में शराब, बाउंसर और फर्जी उपस्थिति का खेल
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार को भेजे एक पत्र में आरोप लगाया है कि “कॉल मी सर्विस” की कार्यप्रणाली अब “साफ-सफाई” से कहीं ज्यादा “साज़िश” का अड्डा बन चुकी है। संघ का दावा है कि कंपनी द्वारा महिला सफाईकर्मियों से आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है, यूनिफॉर्म के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं और नौकरी देने के बदले लाखों की अवैध वसूली की जा रही है।

गार्ड रूम में चल रही ‘दारू पार्टी’ – विरोध करने वालों को धमकी और मारपीट
पत्र में सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि मेकाहारा अस्पताल का गार्ड रूम अब सफाईकर्मियों और सुपरवाइजरों के लिए शराब पीने का अड्डा बन चुका है। और जब कोई कर्मचारी या नागरिक इसका विरोध करता है, तो कथित बाउंसर और गुंडे उन्हें धमकाते हैं या मारपीट पर उतर आते हैं।

फर्जी अटेंडेंस से करोड़ों की सरकारी लूट
संघ के अनुसार कंपनी करीब 30% फर्जी उपस्थिति दिखाकर राज्य सरकार से लाखों नहीं, करोड़ों रुपये की अवैध कमाई कर रही है। कंपनी ने सफाई कार्य का ठेका मिलने के बाद उसे ज़ीरो प्रॉफिट दिखा कर ऐसे लोगों को संचालन सौंप दिया है जो रोज़मर्रा की निगरानी में हेराफेरी करते हैं।

COVID काल बना कमाई का हथियार
संघ का आरोप है कि कोरोना महामारी के दौरान 100 से ज्यादा कर्मचारियों को निकालकर उनकी जगह नए कर्मचारियों से 40-40 हजार रुपये की रिश्वत ली गई। यहां तक कि यूनिफॉर्म देने के नाम पर भी 10-10 हजार रुपये वसूले गए। यह वसूली केवल मेकाहारा में नहीं, बल्कि एम्स, पंडरी जिला अस्पताल और दाऊद कल्याण सुपर स्पेशलिटी जैसे संस्थानों में भी की गई।

राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग चुप क्यों?
पत्र में संघ ने सीधे तौर पर यह आरोप लगाया है कि कंपनी के मालिक राज बोथरा की “ऊपर तक पहुंच” होने के चलते न तो स्वास्थ्य विभाग ने कभी सख्त कार्रवाई की और न ही शिकायतों पर कोई संज्ञान लिया गया।

मांग: कंपनी पर प्रतिबंध और उच्चस्तरीय जांच
संघ ने मांग की है कि “कॉल मी सर्विस” कंपनी का ठेका तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और इसके संचालन, वित्तीय लेनदेन, और अस्पतालों में गतिविधियों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों को सज़ा दी जाए।

यह मामला अब सिर्फ श्रमशोषण का नहीं रहा, यह राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान की गरिमा, जन स्वास्थ्य की सुरक्षा और सरकारी धन की बर्बादी का गंभीर मुद्दा बन चुका है। सवाल यह है – क्या सरकार नींद से जागेगी?

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