Monday, October 5, 2026
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Subramanian Swamy temple dispute : जस्टिस स्वामीनाथन के फैसले को राजनीतिक रंग देने पर भड़की भाजपा

Subramanian Swamy temple dispute : राजनांदगांव। तमिलनाडु के मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन के खिलाफ कांग्रेस, डीएमके और समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा लाए गए महाभियोग नोटिस को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भाजपा नेता अशोक चौधरी ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि वे न्यायाधीश के एक न्यायिक फैसले से असहमति जताने के बजाय, उन्हें व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाकर न्यायपालिका पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं।

यह पूरा विवाद जस्टिस स्वामीनाथन के उस आदेश को लेकर उठा, जिसमें उन्होंने सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर में स्थित दीपस्तंभ पर दीप जलाने की पुरानी परंपरा को बहाल करने का निर्देश दिया था। यह परंपरा पिछले कुछ वर्षों से बंद थी, जिसे धार्मिक अनुयायियों की याचिका पर न्यायाधीश ने पुनः शुरू करने का आदेश दिया। जस्टिस स्वामीनाथन ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि दीप जलाने से किसी अन्य समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता है।

भाजपा नेता अशोक चौधरी ने इस न्यायिक आदेश के खिलाफ महाभियोग नोटिस पर हस्ताक्षर कर उसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपने के लिए विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना की। चौधरी ने आरोप लगाया कि संबंधित राजनीतिक दलों ने न्यायिक आदेश का विरोध करने के लिए उचित कानूनी रास्ता (सुप्रीम कोर्ट में अपील) अपनाने के बजाय, सीधे जज को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

श्री चौधरी ने इस कदम को ‘न्यायाधीशों को भयभीत करने का प्रयास’ बताया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसका कोई स्थान नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कार्रवाई न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर इस तरह का दबाव बनाने की कोशिश देश के लिए खतरनाक है, और अगर यह प्रवृत्ति शुरू हो गई तो कोई भी जज स्वतंत्र रूप से फैसला नहीं कर पाएगा।

अशोक चौधरी ने देश और विशेषकर हिंदू समुदाय से अपील की कि वे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि एक धार्मिक परंपरा को बहाल करने के आदेश पर इस तरह की राजनीतिक प्रतिक्रिया अत्यंत आपत्तिजनक है। उन्होंने विपक्ष से मांग की कि वे इस गैर-जिम्मेदाराना कदम को तुरंत वापस लें और न्यायिक फैसलों पर वैचारिक राजनीति से बाज आएं।

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